मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
पूर्वी चंपारण जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने तथा टीबी (यक्ष्मा) उन्मूलन के संकल्प को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स के लिए श्कफ अगेंस्ट टीबीश् ऐप के उपयोग को लेकर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति स्थित सभागार में किया गया।इस सम्बन्ध में सीएस डॉ दिलीप कुमार ने बताया की अब पूर्वी चंपारण जिले में टीबी उन्मूलन को रफ्तार मिलेगी,क्यूंकि श्कफ अगेंस्ट टीबीश् ऐप को लेकर सीएचओ क़ो दो दिवसीय प्रशिक्षण कराया गया है। उन्होंने बताया की बिहार को टीबी मुक्त बनाने और ग्रामीण स्तर पर संभावित मरीजों की जल्द पहचान करने के उद्देश्य से पूर्वी चंपारण जिले में एक विशेष पहल की गई है। जिले के सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को श्कफ अगेंस्ट टीबीश् डिजिटल ऐप के संचालन और इसके तकनीकी पहलुओं से रूबरू कराने के लिए दो दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण मुख्य प्रशिक्षक पूर्ण भट्टाचार्य द्वारा दिया गया।
– डिजिटल तकनीक से आसान होगी टीबी मरीजों की स्क्रीनिंगरू
दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक पूर्ण भट्टाचार्य ने स्वास्थ्य कर्मियों को ऐप के कार्यबल, डेटा एंट्री और संभावित मरीजों की पहचान करने के वैज्ञानिक तरीकों को विस्तार से समझाया।अब स्वास्थ्य कर्मी संभावित यक्ष्मा (टीबी) रोगियों की स्क्रीनिंग बेहद आसानी और सटीकता से कर सकेंगे। यह ऐप संभावित मरीजों की खांसी की आवाज और अन्य लक्षणों के डिजिटल विश्लेषण के आधार पर टीबी के शुरुआती संकेतों को पकड़ने में मदद करता है।जिला यक्षमा पदाधिकारी डॉ संजीव ने कहा की यह तकनीक बेहद कम समय में प्राथमिक स्क्रीनिंग रिपोर्ट दे देती है, जिससे संदिग्ध मरीजों को आगे की जांच (जैसे बलगम जांच या सीबीनेट टेस्ट) के लिए तुरंत रेफर किया जा सकेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगा स्क्रीनिंग का दायरा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले के दूर-दराज के गांवों में तैनात इस ऐप के जरिए सीधे आम लोगों तक पहुंचेंगे। कई बार लोग सामान्य खांसी समझकर टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। अब इस सीएचओ डिजिटल टूल की मदद से घर-घर जाकर या हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर आने वाले मरीजों की मौके पर ही स्क्रीनिंग कर सकेंगे।उन्होंने कहा की सही समय पर स्क्रीनिंग होने से मरीजों का इलाज जल्द शुरू हो सकेगा, जिससे न सिर्फ मरीज की जान बचेगी बल्कि समाज में टीबी के फैलाव को भी रोका जा सकेगा।
मौके पर डीपीएम ठाकुर विश्वमोहन, डीपीसी भारत भूषण, अमरेंद्र कुमार, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी उपस्थित थे।




















































