मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
गोपालगंज से इस वक्त एक ऐतिहासिक, अलौकिक और आस्था से ओत-प्रोत खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से निकला विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग अब बिहार की धरती पर प्रवेश कर चुका है। यूपी–बिहार सीमा पार कर जैसे ही यह दिव्य शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा, पूरा इलाका हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, शंख-नाद, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा से गूंज उठा।
यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, अखंड भारत की आस्था और आध्यात्मिक चेतना की विराट झलक बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं का सैलाब जगह-जगह शिवलिंग के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। लोगों ने पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए अपनी श्रद्धा अर्पित की।
पहली बार दर्शन का सौभाग्य
श्रद्धालुओं का कहना है कि इतनी विशाल, भव्य और दिव्य शिवलिंग को जीवन में पहली बार देखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कई लोगों की आंखें भक्ति से नम दिखीं, तो कई हाथ स्वतः जुड़ गए।
विराट रामायण मंदिर की ओर अग्रसर
यह शिवलिंग गोपालगंज जिले से होते हुए अब अपने अंतिम पड़ाव पूर्वी चंपारण की ओर बढ़ रहा है, जहां इसका स्थापना स्थल विराट रामायण मंदिर होगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई है ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
33 फीट ऊंचा, 210 टन आस्था का प्रतीक
उल्लेखनीय है कि यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया है।
ऊंचाई: 33 फीट
वजन: लगभग 210 टन
सामग्री: एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित
निर्माण अवधि: करीब 10 वर्ष
यह ऐतिहासिक यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता, सनातन परंपरा और आस्था की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत कर रही है। गोपालगंज की धरती आज साक्षी बनी है उस पल की, जब श्रद्धा स्वयं चलकर भगवान तक नहीं, बल्कि भगवान श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे हैं।





























































