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प्रेम, सोशल मीडिया और जल्दबाज़ी के फैसले और बहकती युवा पीढ़ी, मुुंगेर में युवती ने रेयाजुल संग भागकर की शादी, सदमे में परिवार

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बिहार डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क

बिहार के मुंगेर जिले के सफियासराय थाना क्षेत्र से सामने आई यह घटना सिर्फ एक प्रेम विवाह की कहानी नहीं है, बल्कि आज की बदलती मानसिकता, सोशल मीडिया के प्रभाव और पारिवारिक चिंता के टकराव की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। 18 वर्षीय युवती का घर से भागकर प्रेमी के साथ विवाह करना और उसे सोशल मीडिया पर गर्व के साथ सार्वजनिक करना कई सवाल खड़े करता है—खासकर तब, जब परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर आशंकित हो।

घटना 1 जनवरी की बताई जा रही है। युवती ने अपने प्रेमी मो. नियाजुल के साथ शादी कर सिंदूर लगे फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। वीडियो में युवती यह कहती दिख रही है कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है, वह खुश है और किसी भी तरह की दखलअंदाज़ी नहीं चाहती। यह बयान एक तरफ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रतीक लगता है, तो दूसरी ओर भावनाओं में लिया गया जल्दबाज़ी भरा फैसला भी नजर आता है।

परिवार की चिंता: सिर्फ डर या हकीकत?
युवती की मां ने थाने से लेकर एसपी तक गुहार लगाई है। मां का दर्द और डर शब्दों में साफ झलकता है। उन्होंने आवेदन में यहां तक लिखा कि उनकी बेटी को गंभीर खतरा हो सकता है। यह बयान भले ही अतिशयोक्ति लगे, लेकिन यह माता-पिता की असहायता और डर की चरम स्थिति को दर्शाता है। मां का कहना है कि बेटी बेहद भोली और मासूम है और प्रेम के नाम पर उसे बहला-फुसलाकर भगा लिया गया।

कानूनी पहलू भी उतना ही अहम
सफियासराय थानाध्यक्ष संजीत कुमार के अनुसार, पिता की शिकायत पर अपहरण और शादी की नीयत से भगाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस युवती की तलाश में जुटी है और कानून के दायरे में कार्रवाई की जा रही है। यह साफ करता है कि सोशल मीडिया पर बयान देना कानून से ऊपर नहीं होता—कानून अपनी प्रक्रिया से चलता है।

आज की मानसिकता पर सवाल
आज के दौर में सोशल मीडिया युवाओं को तुरंत फैसले लेने का मंच दे रहा है, जहां भावनाएं सार्वजनिक हो जाती हैं, लेकिन भविष्य के परिणामों पर सोच पीछे छूट जाती है। प्रेम करना गलत नहीं, विवाह करना भी अधिकार है, लेकिन परिपक्वता, संवाद और सुरक्षा को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

समाज के सामने चुनौती
यह मामला प्रेम विवाह के अधिकार बनाम पारिवारिक सुरक्षा की चिंता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बन गया है। कुछ लोग युवती के फैसले को उसकी स्वतंत्रता मान रहे हैं, तो कुछ परिवार की चिंता को जायज़ ठहरा रहे हैं। सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं है।

संदेश साफ है—सावधान रहें

प्रेम में फैसला लें, लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं

सोशल मीडिया पर खुशी दिखाने से पहले कानूनी और सामाजिक परिणाम समझें

परिवार से संवाद टूटे नहीं, क्योंकि डर और चिंता अक्सर प्यार से ही जन्म लेते हैं

प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और कानून का रास्ता अपनाने की अपील की है। मुंगेर के इस गांव की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक चेतावनी है—जहां आज़ादी और ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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