बिहार डेस्क । यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
बिहार में भूमि सुधार व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन अंचल में तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) द्वारा किए गए एक बड़े प्रशासनिक खेल का खुलासा हुआ है, जिसमें 814 ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन पहले अस्वीकृत किए गए और बाद में उसी दस्तावेज पर दोबारा स्वीकृत कर दिए गए।
इस गंभीर अनियमितता को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जांच के बाद सही पाया है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर नियम उल्लंघन के बावजूद संबंधित महिला अधिकारी को केवल ‘निंदन’ जैसी हल्की सजा दी गई है।
क्या है पूरा मामला
जांच में सामने आया कि घोड़ासहन अंचल में पदस्थापित रहते हुए तत्कालीन राजस्व अधिकारी उषा कुमारी ने ऑनलाइन दाखिल-खारिज के 814 मामलों में पहले आवेदन रिजेक्ट किया और फिर उसी दस्तावेज के आधार पर उन्हें स्वीकृत कर दिया। विभाग के अनुसार, यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है।
नियमों के तहत, यदि कोई दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत हो जाता है, तो उस मामले को भूमि सुधार उपसमाहर्ता के न्यायालय में भेजा जाना चाहिए था, न कि उसी दस्तावेज पर दोबारा स्वीकृति दी जानी चाहिए।
स्पष्टीकरण भी नहीं आया काम
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस मामले में उषा कुमारी से स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने 3 जुलाई 2024 को अपना जवाब समर्पित किया, लेकिन विभागीय समीक्षा में पाया गया कि उनका स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं है। इसके बावजूद विभाग ने कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें केवल निंदन की सजा देकर मामला निपटा दिया।
वर्तमान में गया में तैनात
गौरतलब है कि उषा कुमारी वर्तमान में गया जिले के शेरघाटी अंचल में अंचल अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी संख्या में दाखिलदृखारिज मामलों में गड़बड़ी को सिर्फ निंदन तक सीमित करना उचित है।
यह मामला न केवल भूमि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बड़ी अनियमितताओं पर भी कार्रवाई कितनी नरम हो सकती है।




























































