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पटना में एक और NEET छात्रा की रहस्यमयी मौत, ‘शंभू गर्ल कांड’ के बाद कोचिंग–हॉस्टल माफिया पर फिर सवाल

बिहार डेस्क | यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने एक बार फिर कोचिंग और हॉस्टल सिस्टम की काली सच्चाई उजागर कर दी है। गांधी मैदान थाना क्षेत्र के एग्जीबिशन रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा का शव उसके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

पुलिस के अनुसार, सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस टीम और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) को बुलाया गया। पटना सेंट्रल एसपी दीक्षा ने बताया कि कमरे से एक तीन पन्नों का सुसाइड नोट और छात्रा का मोबाइल फोन बरामद हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया है। एसपी के मुताबिक, छात्रा पढ़ाई और कुछ निजी कारणों को लेकर लंबे समय से तनाव में थी।

पिता ने आत्महत्या से किया इनकार, साजिश का आरोप

मृतका के पिता ने इसे आत्महत्या मानने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने गांधी मैदान थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाया गया और यह एक सोची-समझी साजिश है। पिता के बयान के आधार पर पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि दो अज्ञात युवकों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा था। पुलिस अब उन युवकों की पहचान और उनकी भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।

‘शंभू गर्ल कांड’ की याद ताजा

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पटना का ‘शंभू गर्ल कांड’ अभी भी लोगों की स्मृति में ताजा है। उस मामले में भी एक छात्रा की मानसिक प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और सिस्टम की लापरवाही ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। अब एक और NEET छात्रा की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोचिंग हब बन चुके पटना में छात्राएं सुरक्षित हैं?

भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन ने खोली थी परतें

गौरतलब है कि कुछ समय पहले दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में पटना के कई कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों में चल रहे शोषण, मानसिक दबाव, अवैध वसूली और छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार का खुलासा हुआ था।
अब मौजूदा घटना ने भास्कर स्टिंग के खुलासों को और भी गंभीर बना दिया है। सवाल यह है कि क्या छात्राओं की मौतें सिर्फ “पर्सनल स्ट्रेस” का नतीजा हैं, या इसके पीछे एक संगठित सिस्टम जिम्मेदार है?

तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी जांच

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित है। मोबाइल कॉल डिटेल्स, चैट, सोशल मीडिया गतिविधि और सुसाइड नोट में दर्ज नामों की जांच की जा रही है। जिन लोगों का जिक्र नोट में है या जो छात्रा के संपर्क में थे, सभी से पूछताछ की जा रही है।

बड़ा सवाल

लगातार हो रही छात्राओं की मौतें यह सोचने पर मजबूर करती हैं—

क्या कोचिंग और हॉस्टल अब शिक्षा के नहीं, शोषण के अड्डे बनते जा रहे हैं?

क्या प्रशासन हर मौत के बाद सिर्फ “जांच जारी है” कहकर जिम्मेदारी से बच रहा है?

और क्या अगली “शंभू गर्ल” बनने से पहले सिस्टम जागेगा?

यह मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि पूरे कोचिंग–हॉस्टल मॉडल पर सवाल खड़ा करता है।

 

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