मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
रामगढ़वा प्रखंड कार्यालय के सभा कक्ष में सोमवार को आंगनबाड़ी की मासिक बैठक चल रही थी। बैठक के दो घंटा बाद सेविकाओं के पति सीडीपीओ से मिलने की खबर भिजवाया। जब सीडी पीओ नें इनको नहीं बुलाया तो सेविकाओं के पति बैठक के दौरान ही सभा कक्ष में चले गए। वहां इनलोगों नें सीडीपीओ से कहा कि एक घंटे कि बैठक थी और दो घंटों के बाद भी बैठक समाप्त नहीं हुआ। इस दौरान दोनों पक्षो के बीच वाद विवाद होने लगा। सेविकाओं के पतियों नें इस दौरान सीडीपीओ पर दोहरा ब्यवहार करने का आरोप लगाया। इनका कहना था कि सीडीपीओ आँगन बाड़ी केंद्रों से प्रतिमाह वसूली कराती हैं और उसके बाद भी प्रताड़ित करने का भी काम करती हैं। केंद्रों पर निरीक्षण के नाम पर प्रताड़ित एवं धमकी देती हैं । अगर सेविका बाल रंग ले या श्रृंगार कर ले तो भी डांटने लगती हैं। सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतराने में सेविकाओं की समस्या को सुनने की बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार करती हैं। विगत तीन महीनों में 141 सेविकाओं से स्पष्टीकरण मांगी जा चुकी हैं ! इन सभी समस्याओं को लेकर आधे घंटे तक गहमग़हमी बनी रही। बाद में प्रखंड प्रमुख पति विशाल गुप्ता और उप प्रमुख अरविंद पाण्डेय दोनों पक्षो को समझाया और कल मंगलवार को बैठकर बात करने की सहमति बनी।
इस संदर्भ में सीडीपीओ रश्मि कुमारी नें बताया की मोबाइल पोषण ट्रैकर पर किए जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की जा रही थी, समीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर (फाइनेंशियल रिपोर्टिंग सिस्टम) समय पर पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई। सीडीपीओ ने बताया की एफआरएस कार्य पूरा करने का निर्देश दिया जाता रहा है। उन्होंने समय सीमा के बाद भी प्रगति नहीं मिलने पर संबंधित केंद्रों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही थी। इसी बीच सेविका के अभिभावक लोग हंगामा खड़ा कर दिये ,बैठक के बाद वह लोग आराम से कार्यालय में मिलकर भी बात कर सकते थे, जो भी आरोप लगा है वह बे बुनियाद है!


























































