मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
बनारस घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक एवं संगीताचार्य स्वामी आत्माराम मिश्र के आकस्मिक निधन से चंपारण सहित पूरे कला-संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर बनारस घराने के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
रविवार को प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नाथ पाण्डेय मेमोरियल ट्रस्ट, मोतिहारी के तत्वावधान में बलुआ टाल स्थित ट्रस्ट कार्यालय परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों एवं कलाकर्मियों ने स्वामी आत्माराम मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी संगीत यात्रा को नमन किया।
पंडित मार्कण्डेय मिश्र की अग्रणी शिष्या एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध लोक गायिका डॉ. नीतू कुमारी नूतन ने कहा कि स्वामी आत्माराम मिश्र ने कठिन साधना के बावजूद स्वयं को प्रदर्शन की होड़ में न झोंकते हुए बनारस घराने की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित कर अनेक शिष्यों को शास्त्रीय रागों की गहन तालीम दी।
वक्ताओं ने उन्हें सादगी, मृदुभाषी स्वभाव और गहन राग साधना का प्रतीक बताया। उन्होंने दशकों तक चंपारण की धरती को अपने रागदृरंग से समृद्ध किया और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित जनों ने एक स्वर में कहा कि स्वामी आत्माराम मिश्र का जीवन और संगीत साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगा।




























































