बिहार डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
मुजफ्फरपुर में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) सुधीर कुमार ठाकुर को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार को निगरानी की टीम ने उन्हें मिठनपुरा थाना क्षेत्र के चर्च रोड स्थित निजी आवास से दबोचा। कार्रवाई के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, सुधीर कुमार ठाकुर पर एक संविदा कर्मी से दो लाख रुपये घूस मांगने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तारी के समय वे 19 हजार रुपये नकद लेते पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अधिकारी की सेवा अवधि मात्र तीन महीने ही शेष थी, लेकिन रिटायरमेंट से पहले ही वह निगरानी के जाल में फंस गए।
कई पदों का था अतिरिक्त प्रभार
सुधीर कुमार ठाकुर केवल डीएओ ही नहीं, बल्कि आत्मा योजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर,
सहायक निदेशक (शस्य), तिरहुत प्रमंडल का भी प्रभार संभाल रहे थे। बताया जा रहा है कि वे बिहार के एक बड़े राजनेता के संबंधी भी हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
संविदा रिन्यूअल के बदले मांगी रिश्वत
पीड़ित संविदा कर्मी संतोष कुमार ने बताया कि उनकी निविदा आधारित सेवा समाप्त हो चुकी थी। सेवा विस्तार और दोबारा ज्वाइनिंग के बदले डीएओ ने सीधे दो लाख रुपये की मांग की। बार-बार मिन्नत करने के बावजूद अधिकारी रकम कम करने को तैयार नहीं हुए।
मानसिक दबाव में आकर संतोष कुमार ने अपनी जमा-पूंजी और घर की कीमती चीजें बेचकर पैसे जुटाने की कोशिश की, लेकिन अंततः 11 दिसंबर को पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
जाल बिछा, रंगेहाथ गिरफ्तारी
शिकायत की सत्यता जांचने के बाद निगरानी विभाग ने विशेष टीम गठित की। योजना के तहत संतोष कुमार शनिवार को 50 हजार की जगह 19 हजार रुपये लेकर सुधीर कुमार के आवास पहुंचे। जैसे ही अधिकारी ने रकम थामी, पहले से तैनात निगरानी टीम ने उन्हें मौके पर ही धर दबोचा।
गिरफ्तारी के दौरान अधिकारी ने विरोध भी किया, लेकिन टीम ने उन्हें काबू में लेकर जीप से अपने साथ ले गई। इसके बाद ही मोहल्ले के लोगों को पूरे मामले की जानकारी मिली। फिलहाल उनके आवास पर पुलिस बल तैनात है।
अब संपत्ति की भी होगी जांच
निगरानी विभाग के डीएसपी मिथिलेश कुमार ने बताया कि आरोपी को घूस की राशि के साथ गिरफ्तार किया गया है। उनके आवास की तलाशी ली जा रही है ताकि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का पता लगाया जा सके। आरोपी को पटना ले जाकर पूछताछ की जा रही है और जल्द ही निगरानी कोर्ट में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि भ्रष्टाचार चाहे ऊंचे पद पर हो या राजनीतिक रसूख के साए में, निगरानी की नजर से बचना मुश्किल है।





























































