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नए साल का आध्यात्मिक आगाज़: मोतिहारी में अरेराज व केसरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
पूर्वी चंपारण में नववर्ष के जश्न पर परंपरा व अघ्यात्म का जोर रहा। यहां नए साल का स्वागत भक्ति, उत्सव और ऐतिहासिक चेतना तीनों के मेल के साथ हुआ। नया साल आमतौर पर पार्टी, पिकनिक और जश्न से जोड़ा जाता है, लेकिन मोतिहारी में नववर्ष का स्वागत पूरी तरह आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा के साथ किया गया। अरेराज सोमेश्वरनाथ महादेव और केसरनाथ मंदिर समेत अन्य मंदिरों में जहां श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर साल की शुरुआत की, वहीं केसरिया बौद्ध स्तूप के साए में युवाओं और पर्यटकों ने शांति, विरासत और आधुनिक उत्सव का अनुभव लिया।
नववर्ष की पहली किरण के साथ अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंज उठे। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा भोले से नए साल में सुख, स्वास्थ्य और स्थिरता की कामना की।
वहीं केसरनाथ मंदिर में परिवारों की उपस्थिति ने नववर्ष को सामाजिक रंग दिया। दीप, अगरबत्ती और मंत्रोच्चार के बीच लोगों ने न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक मंगलकामनाएं भी कीं। यह नया साल घर, समाज और संस्कारकृतीनों को जोड़ता दिखा।
इसी जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप के परिसर में नया साल अलग भाव में दिखा। यहां न तेज संगीत था, न शोरकृबल्कि शांति, सेल्फी, विरासत और सुकून। युवाओं और पर्यटकों ने स्तूप की ऐतिहासिक भव्यता के बीच नए साल की तस्वीरें लीं, ध्यान किया और यह महसूस किया कि नया साल केवल भविष्य नहीं, अतीत से संवाद भी है। नव वर्ष को यादगार बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप पर करीब लाखों से ज्यादा लोग पहुंचे। नव वर्ष के स्वागत में लोगों ने जमकर मस्ती की और ऐतिहासिक स्तूप के आसपास का माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया सुबह से ही पर्यटकों और पिकनिक मनाने वालों का तांता लगा रहा। लोगों ने बौद्ध स्तूप की परिक्रमा कीएपरिवार और दोस्तों के साथ समय बिताया तथा सेल्फी और फोटो लेकर इस पल को यादगार बनाया। युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखा गया।भीड़ को देखते हुए प्रशासन व स्थानीय पुलिस व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रहीए वहीं जिले के कप्तान स्वर्ण प्रभात स्वंय पहुंच स्तूप का जायजा लिया।नव वर्ष के अवसर पर केसरिया बौद्ध स्तूप पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा।
तीनों प्रमुख स्थलों पर सुरक्षा और यातायात की समुचित व्यवस्था रही। श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के सहयोग से नववर्ष का आगाज़ शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण माहौल में हुआ। कुल मिलाकर, मोतिहारी ने नए साल को यह पहचान दी कि नववर्ष न तो केवल पश्चिमी है, न केवल धार्मिक। यह भारतीय संदर्भ में संतुलन, संस्कृति और चेतना का उत्सव है।

 

 

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