बिहार डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
जहां देशभर में लोग पुराने साल को पार्टी, केक और आतिशबाज़ी के साथ विदा करते हैं, वहीं बिहार के मुंगेर में बच्चों ने जश्न का ऐसा देसी और “संस्कारी” तरीका निकाला कि देखने वाले भी हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
मुंगेर के बरियारपुर थाना क्षेत्र के छभ्-80 पर उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब बच्चों की टोली चार कंधों पर ‘वर्ष 2025’ की अर्थी उठाए पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ निकल पड़ी। आगे-आगे सफेद धोती में लिपटे नन्हे “पंडित जी”, हाथ में घईला में जलती अग्नि, और गूंजते नारेकृ
“राम नाम सत्य है३ 2025 सत्य है!”
नज़ारा ऐसा कि मुंगेर-भागलपुर मुख्य मार्ग पर गाड़ियां रुक गईं, लोग हैरान रह गए और यहां तक कि एक पुलिस वाहन भी ठिठक गया। कुछ पल के लिए लोगों को लगा कि कहीं सच में कोई अनहोनी तो नहीं हो गई! लेकिन जैसे ही पता चला कि यह साल 2025 की प्रतीकात्मक शव यात्रा है, माहौल गंभीरता से सीधा ठहाकों में बदल गया।
जब बच्चों से पूछा गया कि यह “अनोखा संस्कार” क्यों किया जा रहा है, तो उनका जवाब सुनकर लोग और भी हंस पड़ेकृ
“सर, 2025 का दाह संस्कार कर रहे हैं३ अब 2026 को बुलाना है!”
बिना क्श्र, बिना पटाखे और बिना खर्चे के यह देसी जुगाड़ वाला विदाई समारोह न सिर्फ लोगों के लिए मनोरंजन बन गया, बल्कि नए साल के स्वागत का सबसे वायरल और यादगार तरीका भी साबित हुआ।
मुंगेर के इन बच्चों ने बता दिया कि जश्न मनाने के लिए बस आइडिया चाहिए, बजट नहीं!





























































