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आरबीआई ने बैंक कर्मियों व सरकारी संस्थानों को नकली नोट की पहचान व साइबर सुरक्षा का दिया गया प्रशिक्षण

मोतिहारी। यूथ मुंकाम न्यूज नेटवर्क
भारतीय रिज़र्व बैंक, पटना द्वारा मोतिहारी में बैंक कर्मियों, सरकारी संस्थाओं एवं आम जनता के लिए नक़ली नोट की पहचान, इसकी रोकथाम, विदेशी मुद्रा विनिमय तथा साइबर सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भारतीय रिज़र्व बैंक, पटना द्वारा मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में बैंक कर्मियों, सरकारी संस्थाओं यथा राज्य पुलिस, सशस्त्र सीमा बल एवं आतंकवाद निरोधक दस्ता सहित आम जनता के लिए नक़ली नोटों की पहचान, रोकथाम, संबंधित नियमों, विदेशी मुद्रा के सुरक्षित विनिमय तथा साइबर सुरक्षा पर एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आरबीआई पटना के महाप्रबंधक श्री अमित कुमार, उपमहाप्रबंधक नीरज कुमार, राज्य पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, आतंकवाद निरोधक दस्ता तथा विभिन्न बैंकों के अधिकारीगण ने भाग लिया
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नक़ली नोटों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर उनके प्रसार की रोकथाम सुनिश्चित करना, विदेशी मुद्रा का विनिमय केवल अधिकृत एवं विनियमित माध्यमों से कराने हेतु प्रेरित करना तथा डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ उत्पन्न साइबर जोखिमों के प्रति जागरूकता विकसित करना था। पूर्वी चंपारण एक सीमावर्ती जिला होने के कारण इस प्रकार के प्रशिक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जहाँ नक़ली नोटों के अनाधिकृत प्रचलन एवं साइबर धोखाधड़ी की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है।
कार्यक्रम को तीन सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र बैंक कर्मियों के लिए था, जिसमें भारतीय बैंकनोटों के सुरक्षा विशेषताओं, नक़ली नोटों की पहचान के व्यावहारिक पहलुओं, नकली नोटों के प्रबंधन एवं रिपोर्टिंग प्रणाली तथा कटे-फटे एवं गंदे नोटों के विनिमय की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह सत्र बैंकिंग प्रणाली को प्रथम स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा, जिससे नक़ली नोटों की समयबद्ध पहचान एवं प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
द्वितीय सत्र क़ानून प्रवर्तन संस्थाओं, जैसे राज्य पुलिस, सशस्त्र सीमा बल एवं आतंकवाद निरोधक दस्ता, के लिए आयोजित किया गया। इसमें नोटों के सुरक्षा विशेषताओं सहित नक़ली भारतीय मुद्रा की पहचान तथा भारत सरकार एवं भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रासंगिक दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम द्वारा इन संस्थानों का क्षमता संवर्धन किया गया, जिससे नकली नोटों के प्रसार की रोकथाम सहित अंतर-एजेंसी समन्वय स्थापित करने तथा प्रभावी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
तृतीय सत्र आम जनता के लिए टाउनहॉल बैठक के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय मुद्रा के सुरक्षा विशेषताओं एवं नक़ली नोटों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही, डिजिटल भुगतान के सुरक्षित उपयोग, साइबर धोखाधड़ी के सामान्य तरीकों एवं उनसे बचाव के उपायों पर विस्तृत जागरूकता प्रदान की गई। सीमावर्ती जिला होने के कारण, प्रतिभागियों को यह भी अवगत कराया गया कि विदेशी मुद्रा का विनिमय केवल अधिकृत/विनियमित संस्थाओं के माध्यम से नियमसंगत ही किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट ष्पैसा बोलता हैष् (ूूू.चंपेंइवसजंींप.तइप.वतह.पद) जैसे जागरूकता मंचों के माध्यम से नोटों की सुरक्षा विशेषताओं की जानकारी प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया गया, ताकि नागरिक स्वयं भी नकली नोटों की पहचान कर सकें एवं सुरक्षित वित्तीय व्यवहार अपना सकें। अंत में, आम जनता के साथ एक संवाद कार्यक्रम रखा गया, जिसमें उनके उपरोक्त विषयों से संबन्धित प्रश्नों एवं शंकाओं का समाधान किया गया।
इन प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों में नकली नोटों की पहचान, रोकथाम एवं संबंधित प्रक्रियाओं की समझ को सुदृढ़ किया गया। साथ ही, बैंक कर्मियों की परिचालन दक्षता में वृद्धि, सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय एवं कार्रवाई क्षमता को सशक्त बनाने तथा आम जनता में साइबर सुरक्षा एवं वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देने का लक्ष्य प्राप्त किया गया। कार्यक्रम ने समग्र रूप से एक सुरक्षित, पारदर्शी एवं विश्वसनीय वित्तीय पारितंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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