-रक्सौल में बड़ा ऑपरेशन, एसएसबी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बच्चों को दिलाई गई आज़ादी
मोतिहारी | यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
सीमावर्ती शहर रक्सौल में फर्जी मार्केटिंग कंपनियों का बड़ा जाल उजागर हुआ है। एसएसबी 47वीं बटालियन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 400 से अधिक युवाओं को ठगी और जबरन श्रम के चंगुल से मुक्त कराया गया। इनमें कई नाबालिग भी शामिल थे। इस छापेमारी का नेतृत्व एसडीपीओ धीरेन्द्र कुमार और एसएसबी डिप्टी कमांडेंट दीपक कृष्णा ने किया।
🔍 ठगी का गोरखधंधा: नौकरी का सपना दिखाकर बना रहे थे शिकार
छापेमारी में बिन मेकर और डीबीआरओ दिनकर एसोसिएट्स नाम की दो फर्जी कंपनियां पकड़ी गईं, जो दवा कंपनी और नेटवर्किंग के नाम पर भोले-भाले युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठग रही थीं।
✔ इनका नेटवर्क बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल, उड़ीसा समेत कई राज्यों तक फैला था।
✔ रोज़ 100 से 500 युवा फॉर्मल ड्रेस में शहर के अलग-अलग इलाकों में घुमाए जाते थे।
✔ नौकरी के नाम पर पैसे ऐंठकर दवा पैकिंग जैसे मामूली काम करवाए जाते थे।
✔ एक बार इस जाल में फंसने के बाद ये युवा बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते और शिकायत भी नहीं कर पाते।
🚔 गुप्त जांच के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन
एसएसबी की मानव तस्करी रोधी इकाई और प्रयास संस्था को जब इस ठगी की सूचना मिली, तो गुप्त जांच शुरू की गई। इसके बाद एक साथ कई ठिकानों पर छापा मारा गया, जहां से चार लड़कियों समेत 400 बच्चे मुक्त कराए गए।
➡ हालांकि, अब तक सिर्फ 4 से 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि इस गोरखधंधे में और भी बड़े नामों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
👮🏻 ऑपरेशन में शामिल अधिकारी
इस छापेमारी में डीएसपी धीरेन्द्र कुमार, एसएसबी असिस्टेंट कमांडेंट नेहा सिंह, डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार, एसएसबी एसी रजक मिश्रा, सीओ शेखर राज, पुलिस इंस्पेक्टर राजीव नंदन सिन्हा, सब इंस्पेक्टर एकता कुमारी, नेहा कुमारी और अनीता कुमारी के साथ प्रयास संस्था की आरती कुमारी भी शामिल थीं।
📢 क्या पुलिस इस गोरखधंधे की जड़ तक पहुंचेगी?
➡ फर्जी कंपनियों का नेटवर्क इतना बड़ा है कि इसकी पूरी सच्चाई सामने आने में समय लग सकता है।
➡ क्या इन ठगों के सरगना तक पहुंच पाएगी पुलिस?
➡ क्या नौकरी के नाम पर ऐसे जालसाजी करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी?
👉 अब देखना यह होगा कि इस ठगी के जाल को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।