पटना डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति को पटरी पर लाने के लिए कड़ा और विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) जारी किया है। इन नियमों में शिक्षकों के पहनावे, समयपालन, अवकाश, पठन-पाठन, मिड-डे मील, उपस्थिति और वेतन भुगतान तक के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि इन नियमों को सख्ती से लागू कराया जाए।
पढ़ाई होगी पाठ-टीका के अनुसार
अब सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षक पाठ-टीका (Lesson Plan) के आधार पर ही पढ़ाएंगे। बिना पाठ-टीका के क्लास लेना या यह कहना कि “पाठ-टीका घर पर है” अब मान्य नहीं होगा।
हर शनिवार पाठ-टीका पर प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर अनिवार्य
निरीक्षण के समय पाठ-टीका दिखाना जरूरी
हर कक्षा में साप्ताहिक और मासिक परीक्षा अनिवार्य
समयपालन और डिजिटल उपस्थिति जरूरी
सभी शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचेंगे
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज होगी
फर्जी अटेंडेंस पाए जाने पर शिक्षक के साथ-साथ प्रधानाध्यापक भी जिम्मेदार माने जाएंगे
पहली घंटी में क्लास टीचर द्वारा बच्चों की उपस्थिति हर हाल में बनेगी
जींस-टीशर्ट पर रोक, गरिमायुक्त ड्रेस अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि विद्यालय या कार्यालय अवधि में
कोई भी शिक्षक या शिक्षकेतर कर्मी जींस-टीशर्ट में नहीं आएगा
सभी को गरिमायुक्त औपचारिक परिधान पहनना अनिवार्य होगा
मिड-डे मील पहले शिक्षक चखेंगे
मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर भी सख्ती बरती गई है।
भोजन पहले प्रधानाध्यापक और शिक्षक स्वयं चखेंगे
इसके बाद ही बच्चों को भोजन परोसा जाएगा
छुट्टी मिलेगी, लेकिन पढ़ाई प्रभावित नहीं हो
एक समय में अधिकतम 10% शिक्षक ही अवकाश पर जा सकेंगे
बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थिति पर कार्रवाई
प्रधानाध्यापक को यह सुनिश्चित करना होगा कि छुट्टी से पढ़ाई बाधित न हो
वेतन और दफ्तर के चक्कर पर भी लगाम
बैंक से वेतन निकालने के नाम पर स्कूल अवधि में बाहर जाना मना
शिक्षक अपनी समस्याओं के लिए सीधे जिला कार्यालय नहीं जाएंगे
पहले प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को आवेदन देना होगा
जरूरत पड़ने पर BEO ही मामला जिला कार्यालय भेजेंगे
समय पर वेतन, नहीं तो प्रधानाध्यापक जिम्मेदार
हर माह की 25 तारीख तक उपस्थिति विवरणी संबंधित कार्यालय को देना अनिवार्य
देरी, गलती या अधूरी रिपोर्ट पर प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे
शिक्षा विभाग की इस नई गाइडलाइंस से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब अनुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतने वाली। स्कूलों में पढ़ाई से लेकर व्यवस्था तक हर स्तर पर कसावट लाने की तैयारी है।
अब देखना यह है कि ये नियम कागजों तक सीमित रहते हैं या ज़मीनी हकीकत में भी उतनी ही सख्ती से लागू हो पाते हैं।
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति को पटरी पर लाने के लिए कड़ा और विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) जारी किया है। इन नियमों में शिक्षकों के पहनावे, समयपालन, अवकाश, पठन-पाठन, मिड-डे मील, उपस्थिति और वेतन भुगतान तक के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि इन नियमों को सख्ती से लागू कराया जाए।
पढ़ाई होगी पाठ-टीका के अनुसार
अब सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षक पाठ-टीका (Lesson Plan) के आधार पर ही पढ़ाएंगे। बिना पाठ-टीका के क्लास लेना या यह कहना कि “पाठ-टीका घर पर है” अब मान्य नहीं होगा।
हर शनिवार पाठ-टीका पर प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर अनिवार्य
निरीक्षण के समय पाठ-टीका दिखाना जरूरी
हर कक्षा में साप्ताहिक और मासिक परीक्षा अनिवार्य
समयपालन और डिजिटल उपस्थिति जरूरी
सभी शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचेंगे
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज होगी
फर्जी अटेंडेंस पाए जाने पर शिक्षक के साथ-साथ प्रधानाध्यापक भी जिम्मेदार माने जाएंगे
पहली घंटी में क्लास टीचर द्वारा बच्चों की उपस्थिति हर हाल में बनेगी
जींस-टीशर्ट पर रोक, गरिमायुक्त ड्रेस अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि विद्यालय या कार्यालय अवधि में
कोई भी शिक्षक या शिक्षकेतर कर्मी जींस-टीशर्ट में नहीं आएगा
सभी को गरिमायुक्त औपचारिक परिधान पहनना अनिवार्य होगा
मिड-डे मील पहले शिक्षक चखेंगे
मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर भी सख्ती बरती गई है।
भोजन पहले प्रधानाध्यापक और शिक्षक स्वयं चखेंगे
इसके बाद ही बच्चों को भोजन परोसा जाएगा
छुट्टी मिलेगी, लेकिन पढ़ाई प्रभावित नहीं हो
एक समय में अधिकतम 10% शिक्षक ही अवकाश पर जा सकेंगे
बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थिति पर कार्रवाई
प्रधानाध्यापक को यह सुनिश्चित करना होगा कि छुट्टी से पढ़ाई बाधित न हो
वेतन और दफ्तर के चक्कर पर भी लगाम
बैंक से वेतन निकालने के नाम पर स्कूल अवधि में बाहर जाना मना
शिक्षक अपनी समस्याओं के लिए सीधे जिला कार्यालय नहीं जाएंगे
पहले प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को आवेदन देना होगा
जरूरत पड़ने पर BEO ही मामला जिला कार्यालय भेजेंगे
समय पर वेतन, नहीं तो प्रधानाध्यापक जिम्मेदार
हर माह की 25 तारीख तक उपस्थिति विवरणी संबंधित कार्यालय को देना अनिवार्य
देरी, गलती या अधूरी रिपोर्ट पर प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे
शिक्षा विभाग की इस नई गाइडलाइंस से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब अनुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतने वाली। स्कूलों में पढ़ाई से लेकर व्यवस्था तक हर स्तर पर कसावट लाने की तैयारी है।
अब देखना यह है कि ये नियम कागजों तक सीमित रहते हैं या ज़मीनी हकीकत में भी उतनी ही सख्ती से लागू हो पाते हैं।




























































