मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
पता नहीं पप्पू यादव की ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी है कि वे बार-बार कांग्रेस के कार्यक्रमों में बिन बुलाए पहुंच अपनी फजीहत करा लेते हैं, फिर भी मौका मिलते पार्टी व इसके कर्णधारों के गुणवान पूरे तन-मन-धन से करते हैं।
बिन बुलाये कांग्रेस के कार्यक्रमों में पहुंच कर कई बार बेइज्जत हो चुके पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव आज प्रियंका गांधी की सभा में मोतिहारी पहुंच गये थे. कांग्रेस के नेताओं ने उनका नोटिस नहीं लिया. लेकिन आखिरी वक्त में प्रियंका गांधी के इशारे ने पप्पू यादव की इज्जत बचा ली.
बता दें कि कांग्रेस नेत्री सह सांसद प्रियंका गांधी आज बिहार दौरे पर पहुंची थी. पटना में महिलाओं के साथ बैठक करने के बाद वे मोतिहारी में हर घर अधिकारी रैली करने पहुंची. वहां पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी पहले से पहुंचे थे. प्रियंका गांधी के रैली में पहुंचने के बाद पप्पू यादव उनकी नजर में आने की हर संभव कोशिश करने में लगे. पप्पू यादव प्रियंका गांधी के पीछे मंच पर भी पहुंच गये.
बिना बुलाये रैली में पहुंचे सांसद पप्पू यादव का कांग्रेसियों ने कोई नोटिस नहीं लिया. प्रियंका गांधी के सामने कई कांग्रेसी नेताओं ने भाषण दिया. इसके बाद मंच संचालक ने मुख्य अतिथि प्रियंका गांधी को भाषण देने के लिए आमंत्रित कर दिया. इसी बीच कोने में बैठे पप्पू .यादव प्रियंका गांधी के सामने पहुंच गये.
पप्पू यादव को खड़े देखकर प्रियंका गांधी की नजर उन पर पड़ी. इसके बाद उन्होंने मंच संचालक को इशारे में कहा कि पप्पू यादव को भी बोलने का मौका दिया जाये. तब जाकर मंच का संचालन कर रहे नेता ने पप्पू यादव को बोलने के लिए आमंत्रित किया.
पप्पू यादव ने जमकर किया गुणगान
प्रियंका गांधी के इशारे के बाद मंच पर बोलने आये पप्पू यादव ने अपने भाषण में प्रियंका गांधी का जमकर गुणगान किया. उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के भी तारीफौं के पुल बांधे. हालांकि उन्हें ज्यादा देर तक भाषण देने का मौका नहीं मिला.
पहले कई दफा हो चुकी फजीहत
बता दें कि पप्पू यादव कांग्रेस के कार्यक्रमों में कई दफे बेइज्जत हो चुके हैं. पटना के कांग्रेस के दो कार्यक्रमों में उन्होंने राहुल गांधी के रथ पर सवार होने की कोशिश की थी तो उन्हें धक्का देकर नीचे उतार दिया गया था. दो दिन पहले पटना आये राहुल गांधी के कार्यक्रम में उन्हें कहीं जगह नहीं दी गयी तो वे मीडियाकर्मियों के बीच आकर बैठ गये थे.























































