मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
पूर्वी चंपारण में एक वृद्ध ने अनोखा कार्य किया है। गरीबी के कारण अधूरी छूटी पढ़ाई को शुरू करवाने और फिर पढ़ाई की बदौलत सरकारी नौकरी पाने का श्रेय पत्नी को देते हुए एक रिटायर्ड पंचायत सेवक ने यह काम किया है। जो समाज के लिये अनुकरणीय है। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड क्षेत्र में एक रिटायर्ड पंचायत सेवक ने अपनी पत्नी की याद में मंदिर का निर्माण कराया है। मंदिर में अपनी पत्नी की प्रतिमा को स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू की है। इस मंदिर का उद्घाटन सोमवार को बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री राजू सिंह ने किया। कल्याणपुर प्रखंड के भुवन छपरा पंचायत के मधुचाई गांव में पंचायत सचिव के पद से रिटायर बाल किशुन राम ने करीब 60 लाख रुपये की लागत से मंदिर का निर्माण कराया है। करीब पांच साल पहले रिटायर्ड होने के पहले ही पत्नी शारदा देवी का निधन हो गया था। जिनकी याद में मंदिर का निर्माण कराया है।
मंदिर के निर्माण में तीन साल का समय लगा है। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री राजू सिंह ने मंदिर के उद्घाटन के मौके पर कहा कि यह अनोखा मंदिर है। यह मंदिर लोगो के अपने पति-पत्नी के प्रेम को दर्शाता रहेगा। हम से जहा तक होगा इस मंदिर में आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह एक अनोखा उदाहरण है। वही मंदिर के निर्माणकर्ता बाल किशुन राम ने बताया कि उनकी पत्नी उनके लिए लक्ष्मी थी। उसका ही देन था कि उन्हें नौकरी लगी। अचानक छह वर्ष पहले एकाएक उसकी मौत हो गई। उसकी मौत से वो काफ़ी टूट गए थे। उन्हें लगा कि जिसके दम पर उन्होंने नौकरी लिया उसके लिए कुछ करना चहिये।
पत्नी की मौत के बाद वो रिटायर हो गए। तब पत्नी की याद में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। तीन वर्ष पहले मंदिर की नींव रखी गई थी। रिटायरमेंट का जो पैसा मिला था, उसी पैसे से मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर के निर्माण में करीब 60 लाख रुपए खर्च हुए है। बाल किशुन राम ने बताया कि मंदिर में केवल पत्नी की मूर्ति को स्थापित किया गया है, जिसका विधिवत पूजा अर्चना के साथ उद्घाटन किया गया है। बाल किशुन राम बताते है कि गरीबी के कारण उनकी पढ़ाई बीच मे ही छूट गयी। पढ़ाई छूटने के बाद वो मजदूरी करने लगे। इस बीच उनकी शादी शारदा देवी से हो गयी। शादी के बाद पत्नी की प्रेरणा से पढ़ाई शुरू की।