क्राइम डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
गोरखपुर पुलिस ने करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी IAS ललित किशोर को गिरफ्तार किया है, जिसकी निजी जिंदगी, ठगी का नेटवर्क और हाई-प्रोफाइल सेटअप ने पुलिस और प्रशासन दोनों को चौंका दिया है। आरोपी खुद को UP कैडर का IAS अधिकारी, गोरखपुर पोस्टेड बताकर लोगों को ठगता था। उसके पास फर्जी स्टेनो, फर्जी गनर, IAS बोर्ड वाला ऑफिस, फर्जी अखबार, दो लग्जरी गाड़ियां, और चार प्रेमिकाओं की सीक्रेट लाइफ थी।
यूपी के गोरखपुर में अपने फर्जी स्टेनो साले और फर्जी गनर के साथ गिरफ्तार करोड़ों की ठगी के आरोपी फर्जी आईएएस की कहानी गजब की है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ललित किशोर ने निजी जिंदगी में भी कई कारनामे किए हैं। उसकी एक पत्नी और चार प्रेमिकाएं हैं। जिसमें तीन गोरखपुर और एक सीतामढ़ी की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि उसकी तीन प्रेमिकाएं गर्भवती हैं। जालसाज इन लाखों रुपये खर्च करता था। सभी को महंगे मोबाइल, ज्वैलरी आदि दिलाता था। जालसाज की असलियत सामने आने के बाद इनमें से ही एक प्रेमिका ने ललित को पकड़वाने में पुलिस की मदद की है। महंगे कपड़े और ब्रांडेड चीजों का शौकीन आरोपी अपने आपको हाई प्रोफाइल अधिकारी दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ता था। इसके होटल का खर्च भी लाखों में होता था।
पुलिस की गिरफ्त में आया फर्जी आईएएस ललित किशोर खुद को यूपी कैडर का आईएएस और अपनी पोस्टिंग गोरखपुर में बताता था। गोरखपुर के चिलुआताल इलाके के झुंगिया के पास किराये के मकान में उसने बकायदा ऑफिस बनाकर बाहर आईएएस का बोर्ड भी लगाया था। गोरखपुर के भटहट के एक स्कूल समेत कई जगहों पर वह बतौर आईएएस जांच करने पहुंचा था और वसूली भी की थी। लेकिन, पिछले एक वर्ष से गोरखपुर में ठिकाना बनाए इस फर्जी आईएएस पर किसी की नजर नहीं पड़ी।
एक युवक की शिकायत पर शुरू हुई जांच
गोरखपुर के कुसम्ही के युवक ने बिना नाम बताये शिकायत की तो पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन कार्रवाई का आधार नहीं था, इसी बीच मोकामा का व्यापारी मुकुंद एक करोड़ रुपये के साथ पकड़ा गया और केस दर्ज कराया। पुलिस की जांच में पता चला है कि ललित कुमार अपने साथ एक मैनेजर (जो खुद को स्टेनो बताता था) के अलावा दस गनर रखा था। एक गनर को वह तीस हजार रुपये महीने देता था और 60 हजार रुपये मैनेजर को देता था। इसके अलावा दो लग्जरी गाड़ी लोन पर लिया था जिसका 60 हजार रुपये महीने किश्त देता था। कुल मिलाकर पांच लाख रुपये से अधिक महीने भर पर उसका खर्च था। यह तो वह खर्च था, जो वह खुद को अफसर बताने के लिए करता था।
फर्जी अखबार भी कर लेता था तैयार
जांच में पुलिस को कई अखबारों की कतरन मिली हैं, जिसमें वह खुद को मीटिंग में मौजूद दिखा रहा है। डीएम देवरिया की एक बैठक की फोटो को उसने खुद का बना दिया था। इसके लिए फोटो शॉप का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा अखबार में वह वेतन रोकने की कार्रवाई की हेडिंग लगाता था। पुलिस को आशंका है कि एआई की मदद से उसने इन कामों को अंजाम दिया है। इन्हीं कारणों से लोगों को आसानी से यकीन हो जाता था और जालसाजी का शिकार हो जाते थे।
रिश्वत का आरोप लगने के बाद कोचिंग से निकाला गया
पुलिस की गिरफ्त में आया ललित किशोर बिहार के एक बड़ी कोचिंग में बतौर शिक्षक काम कर चुका है। वहां उस पर एक छात्र के दाखिले के नाम पर दो लाख रुपये रिश्वत लेने और फिर दाखिला न कराने का आरोप लगा था। इसके बाद ही वह कोचिंग से निकाला गया और फिर एक युवती को लेकर फरार हो गया। उसके खिलाफ बहला-फुसला कर भगाने का केस दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में उसी युवती से उसने शादी कर ली थी। उसके दो बच्चे भी हैं।
गणित से कर रहा है पीएचडी, अंग्रेजी में जमाता था रौब
आरोपी ललिल किशोर काफी पढ़ा-लिखा भी है। एमएससी करने के बाद वह गणित से पीएचडी भी कर रहा है। कथित निरीक्षण के दौरान वह अंग्रेजी में रौब जमाता था, जिस वजह से लोगों को आसानी से यकीन भी जाता था कि वह बड़ा अफसर ही है। निरीक्षण के दौरान वह अफसरों की तरह ही ड्रेस पहनता था और आगे-पीछे गनर चलते थे। गाड़ी पर नीली बत्ती रहती थी। मोकामा के व्यापारी से ही ठगी कर उसने दो गाड़ी ली थी, जिसमें एक इनोवा है। आमतौर पर यूपी में अफसरों की गाड़ी इनोवा ही है, इस वजह से भी लोगों को शक नहीं होता था।
स्कूलों में जांच करता था, मुख्य कार्यपालक का फर्जी पत्र भी मिला
आरोपी ललित कुमार स्कूलों में जांच करता था और फिर कार्रवाई के नाम पर वसूली किया करता था। इसके अलावा कई लोगों से नौकरी व ठेके के नाम पर ठगी कर चुका है। उसके पास से मुख्य कार्यापालक अधिकारी गोरखपुर का पत्र भी मिला है, जिसके जरिए उसने मोकामा के व्यापारी को ठेका देने का झांसा दिया था। हालांकि, संबंधित विभाग ने अभी पुलिस को तहरीर नहीं दी है।
एसपी की अपील-ठगी हुई है तो आगे आएं
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके साथ जालसाजों ने ठगी की है तो शिकायत दर्ज कराएं। ताकि आरोपी पर कठोर कार्रवाई की जा सके।
























































