बिहार डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
बिहार में साइबर ठगी का जाल लगातार फैलता जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो ऑनलाइन गेमिंग ऐप और सट्टेबाजी के जरिए देश ही नहीं बल्कि दुबई, नेपाल और श्रीलंका तक लोगों को निशाना बना रहे थे। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित फर्जी गेमिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर लोगों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच देते थे। शुरुआत में वे लोगों को छोटे-छोटे फायदे दिखाकर उनका भरोसा जीतते थे, फिर धीरे-धीरे उन्हें जुए की लत लगा देते थे। जब लोग पूरी तरह इनके जाल में फंस जाते थे, तब उनसे बड़ी रकम ऐंठ ली जाती थी।
ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया, मैसेज और कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जोड़ते थे। शुरुआत में कुछ जीत दिलाकर भरोसा बनाया जाता था, लेकिन बाद में लगातार हार के जरिए यूजर्स को ज्यादा पैसे लगाने के लिए उकसाया जाता था। इस तरह धीरे-धीरे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की जाती थी।
फ्लैट से चल रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस ने बताया कि यह पूरा गिरोह पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र स्थित शिवपुरी के एक फ्लैट से संचालित हो रहा था। गुप्त सूचना के आधार पर सेंट्रल एसपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। इसके बाद छापेमारी कर फ्लैट से पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान शशांक शेखर, रिशु कुमार, मनीष कुमार उर्फ भुल्लन, सूर्यदीप राज और सचिन कुमार के रूप में हुई है। सभी की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है और चौंकाने वाली बात यह है कि सभी विज्ञान स्नातक हैं।
भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद
पुलिस ने आरोपितों के पास से 21 मोबाइल फोन, 8 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, क्रेडिट और डेबिट कार्ड समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। जब्त किए गए मोबाइल फोन में कई फर्जी गेमिंग ऐप इंस्टॉल मिले हैं, जिनके जरिए यह गिरोह ठगी का खेल चला रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क भारत के अलावा दुबई, नेपाल और श्रीलंका तक फैला हुआ था। आरोपित पिछले करीब एक साल से पटना में रहकर इस अवैध कारोबार को चला रहे थे। ग्राहकों की पहचान छुपाने के लिए उन्हें अलग-अलग कोड नेम दिए जाते थे, जिससे पुलिस की नजर से बचा जा सके।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य लोगों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क से अब तक कितने लोगों को ठगा गया और कुल कितनी रकम का घोटाला हुआ है।


























































