-अपील पर सुनवाई के बाद बड़ा निर्देश, जिला पदाधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश
मोतिहारी। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
पूर्वी चंपारण जिले में वर्ष 2024-25 की धान अधिप्राप्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर अपील पर सुनवाई के दौरान बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी किया गया है। गोड़वा बसमनपुर पैक्स द्वारा धान खरीद में हेर-फेर, राशन कार्ड धारियों एवं भूमिहीनों से खरीद, तथा जमाबंदी में रकबा बढ़ाकर अधिप्राप्ति करने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित करने का आदेश दिया गया है।
अपीलार्थी श्री राजू बैठा द्वारा दायर अपील आवेदन (अनन्य पंजीयन संख्या-402110213052500775/2) पर दिनांक 13.02.2026 को सुनवाई हुई, जिसमें जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी उपस्थित हुए।
क्या हैं आरोप?
अपीलार्थी ने आरोप लगाया है किक वर्ष 2024-25 में धान अधिप्राप्ति में व्यापक हेरफेर हुआ,वास्तविक किसानों के बजाय राशन कार्ड धारियों एवं भूमिहीनों से खरीद दर्शाई गई. जमाबंदी में ऑडिट कर रकबा बढ़ाया गया.
एक ही किसानों से बार-बार धान खरीद दिखाया गया. सुनवाई के दौरान जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा पूर्व में समर्पित प्रतिवेदन (पत्रांक-3608 दिनांक-09.12.2025 एवं पत्रांक-235 दिनांक-21.01.2026) पर अपीलार्थी ने आपत्ति जताई।
जिला पदाधिकारी को जांच का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी, मोतिहारी को निर्देश दिया गया है कि जांच टीम गठित कर गोड़वा बसमनपुर पैक्स की वर्ष 2024-25 की धान अधिप्राप्ति की विस्तृत जांच कराई जाए। अधिप्राप्ति से संबंधित सभी किसानों का सत्यापन कराया जाए, जांचोपरांत की गई कार्रवाई की रिपोर्ट निर्धारित तिथि पर प्रस्तुत की जाए।
100 पैक्स की भी जांच होगी
सिर्फ एक पैक्स तक मामला सीमित नहीं रखा गया है। जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि जिले के 100 पैक्सों की नमूना (सैंपल) आधार पर जांच की जाए
यह सुनिश्चित किया जाए कि धान अधिप्राप्ति वास्तविक किसानों से ही हुई है, कहीं एक ही किसान से बार-बार खरीद तो नहीं दर्शाई गई। स्पष्ट प्रतिवेदन के साथ अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित हों।
अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई की तिथि 18 मार्च 2026, अपराह्न 01बजे निर्धारित की गई है। अपीलार्थी को भी साक्ष्य सहित उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
धान अधिप्राप्ति किसानों की आय से जुड़ा संवेदनशील विषय है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता बल्कि किसानों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा। अब निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
























































