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ब्रह्माकुमारीज में चित्र के माध्यम से वर्षों पूर्व बताया गया कि इस समय तक होगा कलयुग का अंत, धन की बजाय धर्म मार्ग पर चलने से कल्याण

मोतिहारी। अशोक वर्मा
1936 में स्थापित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सात दिवसीय कोर्स में इस चित्र के माध्यम से स्पष्ट बताया जाता है कि दुनिया में पांच विकारों के कारण आज आग लगी हुई है तथा कलयुग की अवधि अब समाप्ति की ओर है। उसी के दूसरे चित्र मे दिखाया गया है कि कलयुग को भक्तिं मार्ग मे बच्चा बताया जा रहा है।
नीचे दूसरे चित्र में यह दिखाया गया है कि दुनिया अभी वेन्टीलेटर पर चल रही है और उसके साथ के चित्र में यह दर्शाया गया है कि सोई हुई जनता उपर के दोनो चित्रों के इशारे को अनदेखा कर गहरी निद्रा मे सोई हुई हैं ।उनके कानों में ज्ञान अमृत डालकर ब्रह्माकुमारी वस्तु स्थिति की जानकारी दे रही है यानी उनको जगा रही है।
संस्था में यह चित्र ईश्वरीय प्रेरणा से बनाई लगभग 50 -60 वर्ष पूर्व बनाई गई है। विश्व के 140 देशों में संस्था आज फैल चुकी है और तमाम देशों के अंदर इस आध्यात्मिक चित्र सेट के द्वारा लोगों को ज्ञान समझाया जाता है ।यद्यपि चित्रों में अन्य कई और भी महत्वपूर्ण चित्र है, लेकिन वर्तमान संदर्भ में इस चित्र की प्रासंगिकता अधिक हो गई है ।
हजारों वर्षों से यह बात कही जा रही है कि कलयुग अभी प्रथम चरण में है दादा, परदादा ,लकड़ दादा तक यही बात कहते आ रहे हैं ,जबकि यह अपने आप में मंथन करने का विषय है कि आखिर कब तक कलयुग प्रथम चरण में रहेगा? भक्ति मार्ग में चार युगों का वर्णन है -सतयुग,त्रेता , द्वापर और कलयुग। ज्ञान मार्ग में भी स्पष्ट रूप चार युग ही बताया गया है लेकिन प्रत्येक की अवधि 1250 वर्ष बताया गया है। सभी चारो युग मिलकर एक कल्प होता है और कल्प की अवधि 5000 वर्ष होती है। 5000 वर्ष बीतने के बाद घड़ी की सुई के समान एक चक्कर लगकर दोनों सुई जिस प्रकार 12ः00 पर आ जाती है और फिर 1 से नई समय सारणी आरंभ होती है।

ठीक यही स्थिति चार युगों की है। और एक कल्प का जब 5000 वर्ष बीत जाता है तो दुनिया परिवर्तित हो कर एक बार फिर नई दुनिया 1 से आरम्भ होती है, जिसे स्वर्ण कहते हैं ।यह बना बनाया ड्रामा है। इसमें किसी प्रकार का कोई भी बदलाव सम्भव नही है। परमात्मा ने स्पष्ट बताया है कि मैं भी ड्रामा से बंधा हुआ हू और अपने समय पर अवतरित होता हूं। भारत की भूमिपर आकर फिर नई दुनिया स्वर्ग का मैं निर्माण कार्य संपन्न करता हूं । संस्था के तमाम चित्र परमात्मा के निर्देशानुसार बने है। चुकि नई दुनिया दिनोदीन पांच विकारों के ग्रसित होती जा रही है, उपभोक्तावादी, भोग वादी संस्कृति,विज्ञान के तमाम सुख सुबिधा वाले साधन जीवन में अनेक प्रकार की बीमारियों को उत्पन्न करने में आज सहायक बने हुए है।।सम्पुर्ण दुनिया दिनोदिन मूल्य विहीन होती जा रही है। प्रकृति के पांचै तत्व भी बिल्कुल ही तमो प्रधान हो गई है ,इसलिए दुनिया लाख चाहेगी लेकिन परिवर्तन को टाला नहीं जा सकता है । पुराना से नया और नया से पुराना यह प्रकृति का नियम है, इसीलिए एक राक्षस को चित्र मे पृथ्वी को घेरे हुये और आग में जलते हुए दर्शाया गया है । नीचे की जो तस्वीर है उसमें दुनिया वाले आॅक्सीजन पर है साथ जीवन रक्षक दवाइयां ले रहे है।

50 -60 साल पूर्व की बनी हुई तस्वीर का जीवंत दृश्य आज चारो तरफ दिख रहा है। अध्यात्म वह शक्ति है जिसके योग -तपोबल के द्वारा भविष्य में घटने वाली घटनाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है ,। संस्था के संदेश मे तमाम बाते बहुत पहले बताई जा चुकी है। चित्र मे ज्ञान गंगा बनकर ब्रम्हाकुमारीयों के द्वारा घोर निंद्रा मे सोई जनता के कानों में ज्ञान अमृत का घोल डालकर उन्हें जगाया जा रहा है। ब्रहमाकुमारिया कह रही हैं कि -जागो-जागो,उठो- उठो अब नई दुनिया जल्द आने वाली है । अब परमात्मा से संबंध जोड़ कर नई दुनिया में जाने लायक खुद को बना लो। ब्रहमाकुमारियांे के इस संदेश को आज के वर्तमान संदर्भ मे अगर हम देखें तो 2020 से स्पष्ट रुप मे दुनिया का परिवर्तन के दौर से गुजरना आरम्भ हो चुका है। दुनिया वाले इसे विनाशक दौर कह रहे है और ब्रह्माकुमारीज मे इसे परिवर्तन कहा जाया है। प्रत्येक 5000 वर्ष पर परिवर्तन होना बिल्कुल ही तय है। संस्था द्वारा परिवर्तन का अंतिम समय 2036 बताया गया है,क्योंकि परमात्मा ने स्वयं कहा है कि जब मैं अवतरित होता हूं उसके बाद पुरुषोत्तम संगम युग आरंभ होता है और उन्होने पुरुषोत्तम संगम युग की अवधि 100वर्ष बताई है। 1936 में परमात्मा का अवतरण एक साधारण तन में हुआ,जिनका नाम दादा लेखराज था । वे सोने के व्यापारी थे और अपने तमाम चल अचल संपत्ति को इस संस्था के लिए समर्पित कर ईश्वरीय कार्य में लग गए। 2035 मंे 100 वर्ष पूरा हो रहा है और परमात्मा के बताए गए समयावधि अनुसार 2036 तक नई दुनिया का निर्माण हो जाएगा।

फिलहाल परिवर्तन की बेला है जब पुराना घर टूटता है तो समय लगता है, लेकिन इस दौर मे वे लोग अपने आप को सुरक्षित रख सकेंगे जो परमात्मा के सानिध्य में रहेंगे,जो परमात्मा से निकट का संबंध बना लेंगे और जो परमात्मा के श्रीमत पर चलेंगे। यह समय अभी परमात्मा से संबंध जोड़ने का है।
वैसे भी काफी लंबे समय से सभी धर्मावलंबियों के द्वारा यह बात कही जा रही है कि धर्म मार्ग से भटकने के कारण ही दिन प्रतिदिन दुनिया की खराब स्थिति हो रही है,लेकिन लोगों ने इसे अनदेखा किया । धन और सुख साधनों में अपने आपको सिमटकर के खोखले स्वर्ग की अनुभूति करने लगे जो उनके लिए एक भ्रामक और घातक साबित हुआ । आज धन व्यर्थ होता जा रहा है। दुनिया वालो के लिए वर्तमान कयामत के समय में पुरुषार्थ का सुनहरा अवसर है। अभी भी हाथ में 15 वर्ष का समय है और उस समय का सदुपयोग कोई भी कर सकता है । यह बातें संस्था के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से जारी संदेशो के माध्यम से लगातार दिया जा रहा है। बीकेसूरज भाई बीके,बृज्जमोहन भाई,बीके राजू भाई, प्रकाशमणि दादी ,दादी गुलजार, दादी जानकी आदि ने परमात्मा के संदेश को अपने अपने अंदाज में लगातार रखते आ रहे है। दादी जानकी जी ने स्पष्ट कहा है कि मै कौंन मेरा कौंन ,जो मेरा वह आपका प्रथम प्राशासिका मातेश्वरी मम्मा ने तो स्पष्ट कहा है हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझो, हुकुमी हुकुम चला रहा हैै।