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इस देश के राष्ट्रपति को बगैर मास्क सेल्फी खिंचाना पड़ा महंगा, लग गया भारी-भरकम जुर्माना, अपने देश में तो हो जाता हंगामा

इंटरनेशनल डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
कोरोना को लेकर मास्क पहनना दुनिया के सभी देशों में अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन, इसके बाद भी लोगों की लापरवाही आम है। आम लोगों की छोड़ो खास लोग भी इससे अछूते नहीं है। चाहे देश हो या विदेश। ऐसा ही एक मामला खासा चर्चा बटोर रहा है।

लेकिन इसी लापरवाही के कारण एक खस पर ढाई लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यह व्यक्ति भी और कोई नहीं बल्कि चिली के राष्ट्रपति हैं। दरअसल, पिछले दिनों चिली के राष्ट्रपति को एक महिला के साथ घूमते हुए एक तस्वीर सामने आई थी। इस तस्वीर में राष्ट्रपति बिना मास्क के नजर आ रहे थे। जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। मामले को तूल पकड़ते देख राष्ट्रपति सेबस्टियन पिनेरा ने माफी मांग ली। राष्ट्रपति ने कहा कि वे अपने घर के पास एक बीच पर अकेले ही टहल रहे थे, इसी दौरान एक महिला ने उनसे सेल्फी की मांग कर दी।
बिना मास्क पहने एक अजनबी महिला के साथ बीच पर सेल्फी खींचने के लिए चिली के राष्ट्रपति पर 2,57,624 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को राष्ट्रपति सेबस्टियन पिनेरा पर जुर्माना लगाया गया।

भारत में तो आम से लेकर खास तक करने लगते हैं हंगामा
यह मामला तो चिली का है तो कोई हो-हंगामा नहीं हुआ, लेकिन सोचिए यही जुर्माना अगर भारत में किसी खास पर लगाया गया होता तो वे संसद से सड़क तक बवाल काट डालते। उनके अहम को इतना ठेस पहुंचता कि झट संविधान को खतरे में बता देते। दरअसल अपने यहां आम लोगों के वोटों से जितने वाले ये लोग खुद को पता नहीं क्यों खास समझ बैठते हैं, इतने खास कि खुद को कानून से उपर समझ बैठते हैं। यह तो एकलौता मामला है, अपने यहां तो कोरोना गाइडलाइन्स बनाने व इसका पालन करने वाले भी खुलेआम इसकी धज्जियां उडा रहे हैं। कैमरे के सामने आते ही मास्क उतार देते हैं। या मास्क मुंह से नीचे गर्दन तक समेट देते हैं। बड़ी-बड़ी रैलियां कर रहे हैं, फिर भी किसी को एतराज नहीं है। वहीं एक अदना सा आदमी अगर हल्की गलती भी कर दे तो भारी जुर्माना वसूला जाता है। पूरे देश वासी को करीब साल भर से कोरोना गाइडलाइन्स के नाम पर बंध कर रखा गया, मगर चुनाव करीब आते ही अब कोरोना धीरे-धीरे यहां से गायब होने लगा है। ऐसे में आम लोग तो सवाल पूछेंगे, किसी की मिर्ची लगे तो लगे। जरा सोचिए, चुनाव के दौरान दर-दर भटक कर आमलोगों से एक-एक वोट की भीख मांगने वाले चुनाव बाद खुद को इतना वीआईपी क्यों समझ लेते हैं, यह बात समझ में नहीं आती।

 

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