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मूंगफली के सुनहरे रंग से चमकेंगे किसानों के सितारे, दो दशक बाद लौटी मूंगफली की खेती, 40 एकड़ में लहलहायेगी फसल

पीपराकोठी। लोकप्रिय राजेश
मुजफ्फरपुर से नरकटियागंज तक कभी उच्च गुणवत्ता की पहचान से विख्यात चम्पारण की मूंगफली फिर लौट रही है। सूर्यपुर के सैकड़ों किसानों की जीविका का मुख्य साधन रहा मूंगफली दो दशक बाद घर लौटी है। जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। सूर्यपुर के धरमुहां में वर्ष 2000 तक सौ एकड़ में व्यापक तौर पर इसकी खेती होती थी। परंतु गुणवत्तापूर्ण प्रभेद व नीलगायों की समस्या से त्रस्त किसानों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। व धीरे-धीरे इस क्षेत्र से मूंगफली की दुनिया जैसे उजड़ ही गई।

केविके ने किया प्रयास
जिसको लेकर केविके प्रमुख डॉ. अरबिंद कुमार सिंह ने मूंगफली की दुनिया पुनः बसाने का प्रयास किया। किसानों के साथ बैठक कर सभी समस्याएं के निदान का आश्वासन दिया। उनके प्रयास से 45 एकड़ भूमि पर मूंगफली की हरियाली बेखरेगी। बताया कि इसका उत्पादन 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। कीमती होने के कारण आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी है। किसानों को उच्च गुणवत्ता का दर्णी प्रभेद दिया जाएगा।

बिहार में होती है खेती
परंपरागत फसल उत्पादन की तुलना में मूंगफली की खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी है। यह बिहार के गया, अररिया आदि जिलों में किसान मूंगफली की खेती कर आज अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। जून के बाद और जुलाई के प्रथम सप्ताह तक मूंगफली की वैज्ञानिक खेती कर मूंगफली से बेहतर उत्पादन और लाभ दोनों कमा सकते हैं।

अनुकूल है जलवायु
चम्पारण की जलवायु मूंगफली की खेती के लिए अनुकूल है। बताया कि यहां मूंगफली और इसके उत्पादन के क्षेत्र में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। यहां की मिट्टी में मूंगफली को आसानी से उगाया जा सकता हैं। मूंगफली की खेती के लिए भुरभुरी दोमट एवं बलुआई दोमट के अलावे उपयुक्त जलनिकास वाली मिट्टी सर्वाेत्तम मानी जाती है।

ऐसे करें खेती
किसान मूंगफली लगाने के लिए सर्वप्रथम खेत की अच्छी तरह से जुताई करें तथा उससे खरपतवार को निकाल दें। बाद में खेत में पाटा चलाकर खेत को समतल कर दें। किसान मूंगफली की फसल को जमीन में रहने वाले दीमक एवं अन्य प्रकार के कीट से बचाने के लिए मिट्टी में जुताई के दौरान फ्यूराडॉन जैसे अन्य दवाई को उसकी मात्रा के अनुसार मिला दें। किसान मूंगफली को खेतों में 15 से 30 सेमी की दूरी पर लगाएं। एक हेक्टेयर भूमि में मूंगफली लगाने के लिए लगभग 80 से 90 किलो मूंगफली के बीज की आवश्यकता किसानों को पड़ती है।

क्या कहते हैं केविके प्रमुख
केविके प्रमुख डॉ. अरबिन्द कुमार सिंह ने बताया कि किसानों के साथ बैठक कर चहुंमुखी समस्या पर चर्चा किया गया है। वहीं किसानों को 45 एकड़ में खेती के लिए बीज मुहैया कराया जा रहा है। अन्य इच्छुक किसानों के लिए भी बीज उपलब्ध कराया जाएगा।

 

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