– अब तक 500 घरों में लगाए जा चुके घोंसले, अभियान को मिला व्यापक समर्थन

मोतिहारी। अशोक वर्मा।
नगर के चर्चित व्यक्तित्व 2011 में केबीसी के 5 करोड़ राशि विजेता सुशील कुमार ने अपने जीवन को सार्थक करने के लिए ऐसा कार्य आरंभ किया है जो न सिर्फ बिहार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए आज वे आदर्श बन गए है।

3 वर्ष पहले पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए सुशील कुमार ने चंपा का पौधा लगाने का अभियान चलाया, यह वहीं चंपा का पौधा है जिस चंपा के पौधे के नाम पर चंपारण जिला का नामकरण किया गया था। खुशबू के मामले में चंपा के फूल की कोई तुलना नहीं। अंग्रेज यहां के चंपा के फूलों को संग्रह कर इत्र बनाने के लिए फैक्ट्रियों में भेजते थे ।

जिले के विकास के साथ-साथ चंपा के पेड़ धीरे-धीरे खत्म होने लगे, लेकिन सुशील कुमार ने इस महत्वपूर्ण पौधे को घर- घर स्कूल कॉलेज एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं में जाकर पेड़ लगाना आरंभ किया । पेड़ लगाने का शुभारंभ नगर के गर्ल्स हाई स्कूल में मेघा पाटेकर के हाथों वृक्षारोपण करा कर किया। 2 साल तक लगातार उन्होंने इस अभियान को चलाया। उन्होंने पीपल बरगद आदि के पेड़ भी लगाये, लेकिन पिछले वर्ष उन्होंने अपने कार्यक्रम में कुछ और जोड़ दिया और बड़े ही महत्वपूर्ण विषय को चुना ।

गौरैया चिड़िया जो पर्यावरण को संतुलित रखने में काफी सहयोग करती है, उसकी सुधि ली। धीरे-धीरे गौरैया चिड़िया विलुप्त हो रही थी। बहेलिया उसे बेच करके पैसा कमाते थे। यद्यपि चिड़ियों की बिक्री पर रोक है, लेकिन चोरी से बिक्री हो रही थी। गांव से शहरों तक पहले चिड़ियों के लिए लोग दाना डालते थे। बर्तन में पानी डालते थे, यहां तक कि धान का बिनवन भी टांगते थे। लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा समाप्त होने लगी । बहेलिया चिड़ियों को फंसा कर बेचने लगे और गौरैया जिसे अति शुभ मानते हैं , इसे ब्राह्मण का दर्जा हासिल है ,विलुप्त होने लगी। सुशील कुमार ने गौरैया चिड़िया का महत्व को समझा और उन्होंने उसके लिए घोंसला बना कर खुद की राशि से अभियान चलाया। और उस अभियान के तहत 500 घरों में उन्होंने एक बरस मे गौरैया चिड़िया का घोंसलाा को स्वयं लगाया। लोगों ने भी बडा ही उत्साह उमंग दिखाया। उन्होंने इसके साथ एक और काम किया कि सबको निर्देश दिया कि घोंसला जो हर घर में लगाया जा रहा है, उसके आसपास पानी की व्यवस्था जरूर करें, क्योंकि चिड़िया निकलकर पानी पीती है। लोगों ने उनकी बातों पर अमल करना आरम्भ किया। उन्होंने बताया कि अबतक 50 घोसलों में गौरैया चिड़िया अपना आशियाना बना चुकी है, और रह रही है।

सुशील द्वारा उठाये इस आभियान की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। सुशील अपने स्कूटर से घर-घर घूमकर 80000 चंपा, बरगद और पीपल का पेड़ लगाया। 500 गौरैया का घोंसला उन्होंने लगाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है । बताया कि पहले मै मांसाहारी भोजन करता था, लेकिन 1 साल पूर्व में 20 मार्च 2019 को गौरैया दिवस के अवसर पर जब मैंने घोंसला लगाने का अभियान आरंभ किया उसके बाद अचानक परिवर्तन हुआ और मैं मांसाहारी से शाकाहारी हो गया। मेरे मन में संकल्प आया कि जिस तरह हम लोग जीना चाहते हैं उसी तरह पशु-पक्षी भी जीना चाहते हैं और उसको मारकर भोजन बनाना कहीं से भी उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले की अपेक्षाकृत अब मैं अपने को ज्यादा स्वस्थ अनुभव करता हूं।

 

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