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मोतिहारीः भारत बंद के दौरान माले ने लाठी-डंडों संग निकाला आक्रोशपूर्णण, चार घंटे तक एनएच किया जाम, दुकानें खुली रहीं

मोतिहारी। अशोक वर्मा
किसान आंदोलन के समर्थन मे आहूत भारत बंद का मिलाजुला असर रहा। इस दौरान नगर में यातायात को बाधित किया गया ,लेकिन दुकानें खुली रही।

भाकपा माले ने जिलापरिषद से अपने पारंपरिक लाठी- फठ्ठा के साथ आक्रोश पूर्ण जुलूस निकालकर गांधी चैक और एन एच 28 छतौनी चैक को चार घंटे तक जाम किया। जिलाध्यक्ष प्रभु देव यादव ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों के खिलाफ लाया गया तीनो विधेयक किसानों के बर्बादी का सबब बन सकता है। देश मंे कहने की सरकार है, मूलतः देश को अभी कारपोरेट घराने के लोग चला रहे हैं और उनके इशारे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह काला कानून लाया है। पूंजीवादी व्यवस्था को थोपा जा रहा है ताकि किसान बर्बाद हो जाए और वे भूमि को छोड़ दें। केंद्र सरकार चाहती है कि बड़े-बड़े उद्योगपति और कारपोरेट घरानों को भूमि उपलब्ध कराया जा सके । भाकपा माले के नेता विष्ण देव यादव ने छतौनी एनएच पर जाम में धरना पर बैठे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश अभी नाजुक दौर से गुजर रहा है। तानाशाही फरमान जारी किया जा रहा है।देश के किसानों की कमर पहले से हीं टूटी हुई है, अब यह नया किसान कानून जानलेवा साबित होगा। भैरवदयाल सिंह ने अविलंब तीनो कानून वापस लेने की मांग की।

बंदी मे माकपा, राजद , भाकपा और कांग्रेस पार्टी की भागीदारी थी।सभी दल वाले अपने अपने दल का झंडा लिए हुये थे। माकपा नेता ध्रुव त्रिवेदी अरविंद कुमार आदि ने अपने संबोधन में कहा कि लाये गये तीनों कानून देश के इतिहास में काले अध्याय में लिखा जाएगा । इन कानूनों को केंद्र सरकार को अविलंब वापस लेना ही पड़ेगा नहीं तो किसान आज देश मे इस कदर भड़क रहे हैं जो सरकार के लिए और पुलिस बल के लिए उन्हें संभालना मुश्किल हो जाएगा । आज किसान मरता क्या नही करता की स्थिति मे आ गये हैं। सीपीआई के विजय सिंह रामबचन तिवारी आदि भी बंद कराने में अपने कार्यकर्ताओं के साथ दिनभर शहर में घूमते रहे और लोगों को इस काले कानून की जानकारी देते रहे।बंदी के कारण चार घंटे तक शहर के मुख्य मार्ग पर अफरातफरी की स्थिति बनी रही। मुख्य मीना बाजार चैक पर यातायात को पूर्ण तक ठप कर दिया गया परिणाम यह हुआ कि जो भी यात्री दूरदराज से बसों से सुबह मेंउतरे थे उनके लिए काफी कष्ट का सामना करना पड़ा और ये लोग अपने ट्रांक सूटकेस आदि को कंधे पर रखकर या ट्रॉली के द्वारा गंतव्य स्थान की ओर जाते हुए देखे गए। दवा की दुकानें पूर्णः खुली रहेगी और धीरे-धीरे सभी दुकानें खुल गई। टेंपो का परिचालन भी चार घंटे तक रुका रहा और लोगों को इस बंदी के बारे में सभी दलों के नेताओं द्वारा लगातार जानकारी दी जाती नहीं।

 

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