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मोतिहारीः केंद्र सरकार की गरीब व मजूदर विरोधी नीतियों के खिलाफ एक्टू महासंघ गोप गुट का कचहरी चैक पर धरना

मोतिहारी। अशोक वर्मा

केंद्र सरकार के मजदूर ,किसान, छात्र, युवा ,कर्मी एवं महिला विरोधी कारपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों व सेवा संघ द्वारा आहूत देशव्यापी आम हड़ताल के तहत नगर के पूर्वी कचहरी अंबेडकर चैक पर एक्टू और महा संघ गोप गुट द्वारा धरना दिया गया। धरना में भारी संख्या में मजदूर कर्मचारी के अलावा मजदूरों ,कर्मियों और शिक्षकों ने भाग लिया ।

धरना की अध्यक्षता जिला संयोजक विष्णुदेव यादव ने किया और संचालन वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं अवकाश प्राप्त गोप गुट कर्मचारी नेता भैरव दयाल सिंह ने किया। धरना को संबोधित करने वालों में राजद नेता ओम प्रकाश चैधरी, राजन ,महिला जिला अध्यक्ष डॉक्टर शबनम, नगर अध्यक्ष लाल बाबू , रेलवे कर्मचारी संघ के नेता अच्युतानंद पटेल, महा संघ गोप गुट के संजीव कुमार सिंह, अनुराग कुमार, अभय कुमार ,राघवेंद्र कुमार ,अभय कुमार, शैलेंद्र कुमार, मोहम्मद शमी आफताब आलम, भरत राम ,विकास पासवान ,संजीव सिंह, एकटू नेता राजेश कुमार, विशेश्वर कुशवाहा, गीता देवी, भाकपा माले के शंभू लाल यादव ,राघव स्वरूप, लाल शर्मा, शिक्षक नेता सईद उल्लाह अंसारी, रामाकांत यादव, अशोक कुशवाहा, सैफ अली, राम नारायण , वीरेश सिंह ,राजद नेता श्री बालक साहनी आदि मुख्य रूप से थे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज इस स्थल पर मजदूर कर्मचारी वर्ग सरकार के मजदूर विरोधी नीति ,लेबर एक्ट के विरोध में बैठे हैं। सरकार की जो दमनकारी नीति चल रही है तथा राष्ट्र व्यापी प्रतिशोध आंदोलन चल रहा है उसी कड़ी में यह धरना आयोजित है। केंद्र सरकार द्वारा जो भी जनविरोधी, कर्मचारी विरोधी नीति लाई गई है उसेवह अविलंब वापस करें।आज खेती किसानी संकट में है, व्यापार ठप है,देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है, गरीब भूखमरी के शिकार हो रहे हैं ,नई शिक्षा नीति गरीब विरोधी है। यह सरकार मजदूरों किसानों व आम जनता के लिए अभिषाप साबित हो रही है। इसके चंगुल से देश को मुक्त कराना हर देशवासियों का कर्तव्य बनता है। आज के हड़ताल में आशा ,आंगनबाड़ी, शिक्षामित्र के भी लोगों ने काफी संख्या में भाग लिया केंद्र सरकार की नीति का विरोध किया । सभी ने जोरदार ढंग से आवाज उठाया कि केंद्र सरकार अपनी दमनकारी और उत्पीड़न करने वाली नीति को अविलंब वापस ले। पूर्व से जो नियम कानून चल रहे थे उसे ही यथावत रहने दे।

 

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