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जाॅब अलर्टः मोतिहारी समेत राज्य के इंजीनियरिंग काॅलेजों में होगी 3000 पदों पर स्थायी नियुक्ति, पढ़ें पूरी खबर

‘‘तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम’’ परियोजना का मुख्य उद्देश्य है-संस्थानों के प्रयोगशाला, कार्यशाला, पुस्तकालय आदि का आधुनिकीकरण किया जाना, संस्थानों की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर लाये जाने के लिए संचालित पाठ्यक्रमों का अनिवार्य एक्रेडिटेशन नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन से कराया जाना ताकि एक्रेडिटेशन के पश्चात संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जा सके

बिहार डेस्कं। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
राज्य के अभियंत्रण महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक 1376 पद सहित लगभग 3000 पदों पर होगी नियुक्ति होगी। उक्त बातें विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री सुमित कुमार ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कही। कहा कि राज्य सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभागान्तर्गत सात अभियंत्रण महाविद्यालय में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित विश्वबैंक सम्पोषित परियोजना ‘‘तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम-तृतीय चरण के अन्तर्गत राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन एकक द्वारा चयनित एवं अस्थायी ईंगेजमेंट के रूप में नियोजित सहायक प्राध्यापकों की सेवा को प्राप्त करने के लिए परियोजना समाप्ति की तिथि 31.03.2021 के पश्चात पूर्व से जारी शर्त्त के अधीन दिनांक 01.04.2021 से 31.03.2022 तक अथवा अभियंत्रण महाविद्यालयों के लिए सहायक प्राध्यापक के स्वीकृत पद पर नियमित नियुक्ति हाने तक, जो भी पहले हो, राज्य योजना के अधीन परियोजना की अवधि विस्तार किये जाने हेतु अत्यंत हीं महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. उक्त योजनार्न्तगत चयनित राज्य के 7 (सात) अभियंत्रण महाविद्यालयों यथा एम॰आई॰टी॰ मुजफ्फरपुर, बी॰सी॰ई॰ भागलपुर, मोतिहारी अभियंत्रण महाविद्यालय, दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय, गया अभियंत्रण महाविद्यालय, नालन्दा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, चण्डी एवं लोकनायक जयप्रकाष प्रौद्योगिकी संस्थान, छपरा है.

‘‘तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम’’ परियोजना का मुख्य उद्देश्य है-संस्थानों के प्रयोगशाला, कार्यशाला, पुस्तकालय आदि का आधुनिकीकरण किया जाना, संस्थानों की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर लाये जाने के लिए संचालित पाठ्यक्रमों का अनिवार्य एक्रेडिटेशन नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन से कराया जाना ताकि एक्रेडिटेशन के पश्चात संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जा सके. उक्त परियोजना से अच्छाादित तीन संस्थानों एम॰आई॰टी॰ मुजफ्फरपुर, बी॰सी॰ई॰ भागलपुर, तथा नालन्दा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, चण्डी मे एम0टेक0 पाठय्क्रम संचालित हो रहे है.

‘‘तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम-तृतीय चरण’’ के लिए चयनित संस्थानों में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा हस्ताक्षरित एम॰ओ॰यू॰ के आधार पर राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन एकक (NPIU) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आवेदन प्राप्त कर अन्य राज्यों सहित बिहार राज्य के लिए तीन वर्ष अथवा परियोजना समाप्ति की तिथि, जो भी पहले हो, तक के लिए प्रतिमाह रू॰ 70,000/- (सत्तर हजार रूपये) मात्र मानदेय (पॉरफॉरमेन्स के आधार पर 3% वार्षिक वृद्धि के साथ) के आधार पर बिहार राज्य अन्तर्गत आच्छादित 7 (सात) अभियंत्रण महाविद्यालों के लिए कुल 216 (दो सौ सोलह) सहायक प्राध्यापक उपलब्ध कराया गया. इनके मानदेय पर होने वाले शत-प्रतिशत व्यय का वहन परियोजना अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा था. वर्त्तमान में इनमें से 198 (एक सौ अंठानवे) सहायक प्राध्यापक कार्यरत हैं. दिनांक 31.03.2021 को समाप्त हो जाने के पश्चात राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन एकक (NPIU) द्वारा चयनित एवं अस्थायी ईंगेजमेंट के रूप में कार्यरत 198 सहायक प्राध्यापकों की सेवा 31.03.2022 तक अथवा अभियंत्रण महाविद्यालयों के लिए सहायक प्राध्यापक के स्वीकृत पद पर नियमित नियुक्ति हाने तक, जो भी पहले हो, राज्य योजना के अधीन परियोजना की अवधि का विस्तार किया गया है. संप्रत्ति, इन शिक्षकों के मानदेय पर आने वाले कुल व्यय कुल रू॰ 1805.76 (अठारह करोड़ पांच लाख छिहतर हजार रूपये) मात्र का व्यय राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा. उक्त बातें विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री श्री सुमित कुमार ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कही .

राज्य के अभियंत्रण महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के रिक्त 1376 पद सहित लगभग 3000 पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए भी बिहार लोक सेवा आयोग को अधियाचना प्रेषित है. नियमित नियुक्ति मे भी इन शिक्षकों को प्रति वर्ष 5 अंक (अधिकतम 25 अंक) अधिमानता के रुप मे दिये जाने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जा चुका है.