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स्वामी हरिदास संगीत विद्यापीठ के 48 वें स्थापना दिवस पर दिखी लोक संस्कृति की झलक, कला विभूति सम्मानित

मोतिहारी। अशोक वर्मा
स्वस्थ संस्कृति के निर्माण में विगत 5 दशकों से लगी स्वामी हरिदास संगीत विद्यापीठ द्वारा 48 वां स्थापना दिवस समारोह राजेंद्र नगर भवन में किया गया। कार्यक्रम मे चार वैसे विभूतियों को सम्मानित किया गया जिन्होने कला संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
कार्यक्रम का उद्घाटन वयोवृद्ध रंगकर्मी ओम प्रकाश नारायण, वरिष्ठ पत्रकार अशोक वर्मा, प्रसिद्ध नृत्यांगना ऋतुराज एवं तबलावादक अमरेंद्र तिवारी तथा संस्था के सचिव कृष्णा प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया।

लोक गायिका अनीता सिन्हा की स्मृति में आयोजित तीन चरणों के कार्यक्रम के अलग-अलग सत्रों का संचालन डॉक्टर गौरव,अंजनी अशेष, अभय अनंत, एवं अनिल वर्मा ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पम्मी कुमारी के निर्देशन में गणेश वंदना एवं स्वागत नृत्य से हुआ जिसे बच्चियों ने बड़े ही मनोहारी अंदाज में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के आरंभ में संस्था के क्रियाकलापों का प्रतिवेदन विस्तार से रवीश मिश्रा एवं देवप्रिये मुखर्जी ने पढ़ा । प्रतिवेदन में बताया गया कि प्रयागराज एवं चंडीगढ़ से मान्यता प्राप्त इस संस्था मे गीत संगीत नृत्य मे एमए तक की शिक्षा दी जाती है। आपातकाल में जब प्रेस की आजादी पर अंकुश के साथ किसी भी नाटक या सांस्कृतिक आयोजन पर प्रतिबंध था उस दौर में इस संस्था का गठन किया गया। संस्था स्वस्थ संस्कृति की स्थापना में विगत 48 वर्षों से कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में अति आकर्षक प्रोग्राम चकचंदा की प्रस्तुति प्रदीप कुमार वर्मा के निर्देशन मे की गई। यह नृत्य नाटिका थी जो मिथिला एवं चंपारण में कभी काफी प्रसिद्ध थी ।इसमे दिखाया गया कि स्कूल के शिक्षक अपने छात्रों को समूह में लेकर प्रति छात्र के घर जाकर छात्र के आंखों पर पट्टी बांध बुराइयो से बचने का संकल्प कराते है।उसे किसी भी गलत को न देखने का संकल्प कराकर आशीर्वाद देते है। बच्चे की मां पिता गुरु दक्षिणा देते हैं। यह परंपरा अभी विलुप्त हो चुकी है लेकिन इसको बड़े ही जीवंत अंदाज में प्रस्तुत किया गया।इस प्रस्तुती की काफी प्रशंसा हुई । प्रस्तुत करने वाले कलाकारों में शिक्षक विजय कुमार दास ,आदित्य, अर्चना, रितिका ,अमृता, दीक्षा ,गुंजा, रीटा, दीपा, सचिन पांडे, प्रदीप कुमार वर्मा, आदित्य, मेहुल, मानसी, गौरव थे। कार्यक्रम में कजरी की प्रस्तुति हुई तथा मातृ दिवस के अवसर पर अनीता सिन्हा की पुत्री अमृता एवं नतिनी सहर्षा, रंजन रिमोसी रंजन ने मां को समर्पित बड़ा ही सुंदर गीत प्रस्तुत किया ।कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति पांवरिया नृत्य की हुई जो बिल्कुल स्वाभाविक अंदाज में थी । चंपारण में आज भी इसकी परम्परा को सुदूर गांव में देखी जाती है । पांवरिया नृत्य की प्रस्तुति तब होती है जब घर में बच्चे का जन्म होता है, तभी पांवरिये उस घर में जाकर नृत्य करके जश्न मनाते हैं वे बच्चे को गोद में भी लेते हैं और तब तक बच्चे को उसके माता-पिता ,दादा-दादी को नही देते जब तक कि उन्हें मुंह मांगा इनाम बक्शीश नहीं मिल जाती ।यह एक खुशी का माहौल होता है तथा पांवरिया उस बच्चे के घर परिवार के सभी सदस्यों की सुख समृद्धि की कामना नृत्य के माध्यम से करते हैं। पांवरिया नृत्य प्रस्तुत करने में रविशंकर, विजय दास ,चंदन कुमार, अमरेंद्र कुमार आदि थे ।स्वामी हरिदास संगीत विद्यापीठ के सधे हुए कलाकारों ने इस नृत्य को बखूबी बड़े ही सहज अंदाज में प्रस्तुत किया ।एक बार ऐसा लगा कि नृत्य करने वाले कलाकार लड़कियां हैं लेकिन ऐसी बात नहीं थी सभी पुरुष कलाकार थे जो काले रंग के घागरा एवं अपने पारंपरिक लिबास में नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दूसरे चरण में सम्मान समारोह का आयोजन था । जिन विभूतियों को सम्मानित किया गया उनमे नाटक रंगमंच के क्षेत्र से ओम प्रकाश नारायण , पत्रकारिता के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वाले अशोक वर्मा ,नृत्य से ऋतुराज, तबला वादक अमरेंद्र तिवारी थे।सभी को मोमेंटो ,साल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया । सम्मानित करने वालों में जिला श्रम अधीक्षक, स्काउट गाइड के रत्नेश्वरी शर्मा ,डॉक्टर अतुल कुमार ,संस्था के सचिव कृष्णा प्रसाद थे।
संपूर्ण कार्यक्रम में वाद्य पर राजा अंसारी ,अमित कुमार ,ढोलक पर योगेंद्र यादव ,तबला पर विजय कुमार थे।

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