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25 वर्ष से दहाउर मियां का परिवार कर रहा छठ, इस बार पुत्री को सौंपा छठ महापर्व का व्रत

-हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक जिहुली बागमती पुरानी धार जमुनिटोला, वर्षों से छठ सेवा समिति के संयोजक बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते दहाउर
– छठ व्रती के पति, पुत्र और भाई ने परंपरा को निभाने का लिया संकल्प

नीरज कुमार। पताही
पताही थाना क्षेत्र के मोतिहारी-शिवहर सड़क को जोड़ने वाली बागमती नदी जिहुली घाट के समीप छठ महापर्व को लेकर भले ही सरकारी गाइडलाइंस ने कोरोना काल में पर्व को थोड़ा प्रभावित जरूर किया। लेकिन हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आस्था का महापर्व पर प्रखंड क्षेत्र के साथ जामुनीटोला हिंदू मुसलमान एकता की मिसाल कायम कर रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि छठ समिति के संयोजक के रूप में मुस्लिम समुदाय से आने वाले समाजसेवी दहाउर मियां, मोहम्मद मुमताज, फूल हसन ,वर्षों से यहां की व्यवस्था का कमान संभालते आ रहे हैं। साथ ही इनका परिवार 25 वर्षों से छठ महापर्व सपरिवार हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मनाते हैं, वहीं इस बार, इसी क्रम में शुक्रवार को दहाउर मियाँ, मोहम्मद मुस्ताक, के नेतृत्व में दर्जनों की संख्या में मुस्लिम व हिंदू समुदाय के लोगों में क्रमशः मोहम्मद अदालत, मोहम्मद अईनुल, महामजान मोहम्मद, ईशा मोहम्मद, सागर राय, मोहन राय, उपेन्दर पासवान ,चंदेश्वर पासवान ,मुख्तार पंडित, रामरेखा पडित, दीपू सिंह ,सियाराम सिंह। घाटों की साफ-सफाई के बाद, छठी मैया की मूर्ति सूरज भगवान प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना की शुरुआत की है। जो हिन्दु मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की। छठ समिति के दहाउर मियाँ, ने बताते हैं कि जमुनिटोला, कि नजदीक से 1993 तक बागमती नदी की मुख्यधारा थी, जिस पर गांव के सभी लोग छठ पूजन का आयोजन करते थे, बागमती नदी मुख्यधारा को छोड़कर पूरब चली गई, जो शिवहर सीमा में पड़ता है, वही पुरानी बागमती नदी की धार पर वर्षों से भगवान भास्कर व छठ मैया की मूर्ति बनाई जाती है। जहां हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार सहयोग भी करते हैं। जिससे पोखर पर दो समुचित रोशनी के लिए जनरेटर का प्रबंध किया जाता है। तथा जगह-जगह तोरणद्वार बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू मुस्लिम समुदाय के सामूहिक चंदा से छठ घाटों पर छठ व्रतियों की सुविधा के लिए नहाए-खाय, खरना और अस्ताचलगामी तथा उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने से पूर्व पथ पर रोशनी व साफ-सफाई की व्यवस्था कराई जाती है। जिससे समूचे गांव में छठ व्रत के दौरान अनेकता में एकता का नजारा दिखता है। दहाउर ने बताया कि पत्नी, रसूली बेगम ,कुछ दिनों से आप स्वस्थ हो गई थी, तो अपनी पुत्री शिवहर जिले के तरियानी तरियानी थाना क्षेत्र के छपरा गांव निवासी, मोहम्मद शफीक, की पत्नी लालो खातून, कोई इस बार छठ महापर्व सौंप दी है, वही हमारे दो पुत्र, मोहम्मद शोएब मोहम्मद जावेद, छठ महापर्व की शुरुआत में दोनों शाम का दंड देकर अपने आस्था, और विश्वास को कायम रखा हैं।

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