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ब्रहमाकुमारीज संस्था चिरैया में कर रही चमत्कारिक यौगिक खेती, खरीदार भी दे रहे प्राथमिकता

मोतिहारी। अशोक वर्मा
जैसे-जैसे प्रकृति तमो प्रधान होती जा रही है वैसे -वैसे नाराज धरती हमें विशाक्त अनाज सब्जी देने को मजबूर होती जा रही है। ऐसी बात नहीं कि धरती अपने पुत्रों को जानबूझकर विषयूक्त फसल दे रही है बल्कि मनुष्य ने प्रकृति का दोहन कर उसे विषयुक्त भोजन देने को विवश किया है।
कहा जाता है जब कोई बीमार होता है तो दवा देकर उसे कुछ दिनों के लिए जिंदा रखा जाता है। दवाई अति खर्चीली होती है लेकिन लोग प्रेम बस ऐसा करते हैं। यही स्थिति आज विषयुक्त फसल के साथ है ।धरती की उर्वरा शक्ति कमजोर और काफी क्षीण हो चुकी है। मवेशी खाद्य डालने से भी फसल कम हो रही है। धरती अभी बीमार है। बीमार धरती को स्वस्थ करने के लिए इंजेक्शन, रसायनिक खाद ,जो एक हाई एंटीबायोटिक है, दवा के रूप में दी जा रही है ।

इतना ही नहीं अब तो फसल को विभिन्न प्रकार के आधुनिक इंजेक्शन भी देकर उसके आकार को बड़ा किया जा रहा है। हाइब्रिड का फसल उपजाया जा रहा है। पारंपरिक मवेसी खाद्य देने की प्रणाली जैसे- जैसे कमजोर हुई, वैसे- वैसे धरती की स्थिति कमजोर होती गई। बाद में जैविक खाद का प्रचलन हुआ लेकिन वह भी अच्छी फसल देने में असफल रहा। अंत में भारत की प्राचीन पद्धति योगीग खेती को एक बार ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा पूरे देश भर में लागू किया गया है। इस पारंपरिक खेती द्वारा जो भी फसलें,सब्जी उत्पादित हो रही है वह स्वास्थ्यवर्धक है। मार्केट में इसकी मांग भी अधिक है। चिरैया में संचालित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र के भाई द्वारा बड़े भूभाग पर योगीक खेती की जा रही है। बीके श्याम भाई ने बताया कि हम लोग प्रतिदिन फसलों को योग का प्रतिकंपन देते हैं । फसल भी प्रेम की भूखी होती है और हम उसके बीच प्यार बांटते हैं। इसके अलावा विशेष विधि से उड़द का दाल, गोमूत्र, गोबर ,नीम पत्ता आदि से तैयार खाद का छिड़काव खेतों में करते हैं। पानी के पटवन की व्यवस्था की गई है । सबसे बड़ी बात खेत के मुंडेर पर सुबह-शाम हम लोग घूम कर के फसलो के बीच अशीम प्यार लुटाते हैं।

परिणाम फसलों का साइज भी बड़ा होता है तथा स्वास्थ्य वर्धक भी हो रहा है। उपजा तो इतना अधिक हो रहा है कि इसका अनुमान भी हम लोगों ने नहीं की थी। उन्होंने खेत के कद्दू के आकार को दिखा कर कहा कि यह इससे भी बड़ा होने वाला है। खीरा ,ककड़ी, मिर्ची ,करेला, मकई का भुट्टा आदि को तमाम प्लॉट में घुमा- घुमा कर उन्होंने दिखाया और कहा कि इस खेत के अनाज एवं सब्जी की मांग चिरैया बाजार में काफी है। खरीददार प्राथमिकता हमें देते हैं, क्योंकि इसका जिन लोगो ने भी सेवन किया है वे शारीरिक रूप से दिनोदिन स्वस्थ होते गए। यह बाबा का चमत्कार है। बाबा की शक्ति से यह खेती हम लोग कर रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि हम लोग शिव बाबा से शक्ति लेकर फसलों के बीच उसका पतिकंपन देते हैं। सुबह में ऐसा लगता है कि सारे फसल मुस्कुरा रहे हो। और वे हम लोगों से भी मिलन मना रहे हो। यह दृश्य चमत्कार से कम नहीं है। यहाँ जो भी सब्जी, धान गेहूं की उपज होती है सभी स्वास्थ के लिए अति लाभप्रद है।

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