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नाइजीरिया में बोको हरम की दरिंदगी, धान के खेतों में काम करने वाले 43 मजदूरों की हत्या, छह घायल

इंटरनेशनल डेस्क। यूथ मुकाम न्यूज नेटवर्क
नाइजीरिया में बोको हरम की दरिंदगी फिर सामने आई है। बोको हरम के लड़ाकों ने धान के खेतों में काम करने वाले 43 मजदूरों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी। वहीं, छह मजदूरों को घायल कर दिया। इस घटना को शनिवार को उत्तर पूर्वी नाइजीरिया के मैदुगुरी शहर में अंजाम दिया गया। जिहादी विरोधी मिलिशिया ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन मजदूरों को पहले रस्सियों से बांधा गया और फिर क्रूर तरीके से इनके गले को काट दिया गया।

इस हमले में बचने वाले लोगों की मदद करने वाले मिलिशिया नेता बाबाकुरा कोलो ने बताया कि हमने घटनास्थल से 43 शवों को बरामद किया है। सभी की निर्मम तरीके से हत्या की गई है। छह अन्य बुरी तरह घायल हैं। उन्होंने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह बोको हरम का काम है, जो इस इलाके में सक्रिय है और लगातार मजदूरों पर हमला करता रहता है।
राष्ट्रपति ने कहा, हमले से पूरा देश हुआ घायल
नाइजीरिया के राष्ट्रपति मोहम्मदू बुहारी ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि इन हत्याओं से पूरा देश घायल हुआ है। एक और मिलिशिया इब्राहिम लिमन ने बताया कि इस घटनाक्रम में मारे गए मजदूर उत्तर पश्चिम नाइजीरिया के सोकोतो राज्य के थे। ये सभी लोग काम की तलाश में इस इलाके में आए थे। लिमन ने बताया कि 60 मजदूरों को धान के खेत में काम करने का जिम्मा सौंपा गया था।

आठ लोग अभी भी लापता
लिमन ने बताया कि बोको हरम के हमले में 43 लोगों की मौत हुई है और छह लोग घायल हुए हैं। वहीं, आठ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जिहादियों ने इन लोगों को अगवा कर लिया है। खोज अभियान में मदद करने वाले एक स्थानीय नागरिक माला बुनु ने बताया कि शवों को जाबरमारी गांव ले जाया गया है जहां उन्हें रविवार को दफन करने से पहले रखा जाएगा।

अब तक 20 लाख लोग हो चुके हैं विस्थापित
पिछले महीने, बोको हराम के लड़ाकों ने दो अलग-अलग घटनाओं में मैदुगुरी के पास सिंचाई के खेतों में काम कर रहे 22 किसानों की हत्या कर दी। बोको हराम ने अपने हिंसक अभियान में किसानों, मजदूरों, चरवाहों और मछुआरों को तेजी से निशाना बनाया है। बोको हरम इन लोगों पर जासूसी करने और सेना और स्थानीय मिलिशिया से लड़ने की जानकारी देने का आरोप लगाता रहा है। साल 2009 के बाद से करीब 36 हजार लोगों की जिहादी विवाद में जान जा चुकी है और 20 लाख से ज्यादा विस्थापित हो चुके हैं।

 

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